ईरान-अमेरिका-इजरायल जंग के बीच भारत ने एक बड़ी अफवाह को सिरे से खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि अमेरिका भारतीय पोर्ट्स या नेवल बेस का इस्तेमाल करके ईरान पर हमले नहीं कर रहा. ये क्लेम पूरी तरह ‘फेक और फॉल्स’ है.
यह दावा क्या था और विदेश मंत्रालय ने क्या सफाई दी?
दावा- ये खबर एक अमेरिकी चैनल वन अमेरिका न्यूज नेटवर्क (OANN) से शुरू हुई, जहां पूर्व अमेरिकी आर्मी कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने इंटरव्यू में कहा था कि अमेरिका के अपने बेस और हार्बर तबाह हो चुके हैं, इसलिए वो अब भारतीय पोर्ट्स पर निर्भर है. उन्होंने कहा, ‘हमारे सभी ठिकाने नष्ट हो गए हैं. हमारे बंदरगाह सुविधाएं नष्ट हो गई हैं. हमें भारत और भारतीय बंदरगाहों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जो आदर्श नहीं है.’
सफाई- MEA के फैक्ट चेक अकाउंट ने X पर पोस्ट करके इसे ‘बेसलेस’ बताया. पोस्ट में लिखा, ‘Fake News Alert! OAN जैसे अमेरिकी चैनल पर दावे कि भारतीय बंदरगाहों का अमेरिकी नौसेना इस्तेमाल कर रही है, नकली और गलत हैं. हम ऐसी बेबुनियाद और जाली टिप्पणियों से सावधान करते हैं.’
Fake News Alert!
Claims being made on OAN, a US based channel that Indian ports are being used by the US Navy are fake and false. We caution you against such baseless and fabricated comments. pic.twitter.com/xiFWnkoXBk
— MEA FactCheck (@MEAFactCheck) March 4, 2026
भारत के ट्रेड और एनर्जी सप्लाई चेन पर असर
भारत बार-बार दोहरा रहा है कि वो इस जंग में किसी तरफ नहीं है. हम पूरी तरह न्यूट्रल हैं और किसी को अपनी जमीन, बंदरगाह या हवाई क्षेत्र इस्तेमाल नहीं करने देते. MEA ने पहले भी कहा था कि बातचीत और कूटनीति से ही तनाव कम होना चाहिए. इस जंग से हमारे करीब एक करोड़ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, ट्रेड और एनर्जी सप्लाई चेन पर असर पड़ रहा है.
ये दावा ऐसे समय में आया जब अमेरिकी पनडुब्बी ने भारतीय हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को डुबो दिया, जिसमें कम से कम 80-87 क्रू मेंबर्स की मौत हुई. ये जहाज भारत में हुए नेवल एक्सरसाइज (MILAN 2026) से लौट रहा था. लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि इस हमले में हमारे बंदरगाहों का कोई रोल नहीं था.


