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भारत कब आया था ईरान का IRIS Dena, जिसे अमेरिका ने समंदर में डुबोया, कैसे किया अटैक?
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भारत कब आया था ईरान का IRIS Dena, जिसे अमेरिका ने समंदर में डुबोया, कैसे किया अटैक?

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ईरान की नौसेना का युद्धपोत IRIS Dena हाल ही में भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक कार्यक्रम में हिस्सा लेकर लौटा ही था कि हिंद महासागर में बड़ा सैन्य घटनाक्रम हो गया. श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी के टॉरपीडो हमले में यह जहाज डूब गया. इस घटना ने भारत की रणनीतिक और सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि जिस युद्धपोत ने कुछ दिन पहले भारत के नौसैनिक कार्यक्रम में भाग लिया था, वही अब समुद्र की गहराइयों में समा चुका है.

भारत क्यों आया था IRIS Dena
IRIS Dena ईरानी नौसेना का एक Moudge क्लास फ्रिगेट था. यह जहाज फरवरी में भारत में आयोजित दो बड़े नौसैनिक आयोजनों में शामिल होने आया था. पहला था इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 और दूसरा बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास MILAN 2026. दोनों कार्यक्रम विशाखापत्तनम में आयोजित किए गए थे.

इन आयोजनों में दुनिया के कई देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया था और 80 से ज्यादा युद्धपोत समुद्र में एक साथ दिखाई दिए थे. इस कार्यक्रम का उद्देश्य समुद्री सहयोग और नौसैनिक कूटनीति को प्रदर्शित करना था. इस नौसैनिक परेड की समीक्षा द्रौपदी मुर्मू ने की थी.

लौटते वक्त श्रीलंका के पास हुआ हमला
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद IRIS Dena हिंद महासागर के रास्ते ईरान लौट रहा था. इसी दौरान गाले, श्रीलंका से लगभग 40 नॉटिकल मील दक्षिण में इस पर हमला हुआ. रिपोर्टों के अनुसार, जहाज पर एक जोरदार विस्फोट हुआ जिसके तुरंत बाद उसने संकट संदेश भेजा. कुछ ही मिनटों में जहाज में पानी भरने लगा और राहत टीमें पहुंचने से पहले ही यह समुद्र में डूब गया. उस समय जहाज पर लगभग 180 नौसैनिक मौजूद थे. बचाव दल को कई शव मिले हैं, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं.

अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से किया हमला
हमले की पुष्टि अमेरिका ने की है. बताया जा रहा है कि अमेरिकी स्टेल्थ पनडुब्बी से छोड़े गए भारी टॉरपीडो से यह हमला किया गया. विशेषज्ञों के अनुसार इसमें संभवतः Mark 48 हेवीवेट टॉरपीडो का इस्तेमाल हुआ, जो ध्वनि संकेतों के जरिए लक्ष्य का पीछा करता है और फिर सैकड़ों किलोग्राम विस्फोटक के साथ फटता है. यह घटना इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से दुश्मन के युद्धपोत को डुबोया है.

आधुनिक युद्ध में टॉरपीडो का दुर्लभ इस्तेमाल
पिछले कई दशकों से समुद्री युद्ध में मुख्य रूप से मिसाइल और एयर पावर का इस्तेमाल होता रहा है. लेकिन IRIS Dena के डूबने की घटना ने दिखा दिया कि पनडुब्बियों से दागे जाने वाले टॉरपीडो आज भी समुद्र में सबसे घातक हथियारों में से एक हैं. पेंटागन ने कहा है कि हमला अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुआ.

भारत के लिए क्यों अहम है यह घटना
यह घटना भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि हमला जिस जगह हुआ, वह क्षेत्र भारत के रणनीतिक समुद्री पड़ोस में आता है. हिंद महासागर में श्रीलंका के दक्षिण का इलाका वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के प्रमुख समुद्री मार्गों में शामिल है. इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य टकराव समुद्री सुरक्षा और शिपिंग स्थिरता को प्रभावित कर सकता है.



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