एबीपी न्यूज के नेशनल ब्यूरो चीफ आशीष सिंह ने भारत में खामेनेई के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही के साथ खास बातचीत की. इस दौरान डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने बताया कि आयतुल्लाह अली खामेनेई और उनके बेटे काफी सादगी भरा जीवन जीते थे. खामेनेई का निजी जीवन बेहद साधारण था. उनके चार बेटे हैं. हैरानी की बात ये है कि उनमें से किसी के पास अपना घर नहीं है और वे किराए के मकान में रहते हैं. खामनेई ने अपने जीवन में सरकार से वेतन नहीं लिया और अपनी जरूरतों के लिए दोस्तों से मिले छोटे-मोटे उपहारों का इस्तेमाल किया.
मुज्तबा के पास कपड़े खरीदने के पैसे नहीं थे
भारत में प्रतिनिधि डॉ.अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि मक्का में हज यात्रा के दौरान खामेनेई के दूसरे बड़े बेटे मुज्तबा खामेनेई के पास कपड़े खरीदने के लिए भी बहुत कम पैसे थे. उनके अनुसार यह उदाहरण यह दिखाने के लिए दिया गया कि उनका परिवार भी सादा जीवन जीता है.
डॉ.अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि आयतुल्लाह अली खामेनेई ने हमेशा आम लोगों की तरह जीवन जीने पर जोर दिया. उनके अनुसार कई बार सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें सुरक्षित बंकर या किसी गुप्त स्थान पर रहने का सुझाव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया. उनका कहना था कि अगर देश के लगभग 9 करोड़ लोगों के लिए ऐसी सुरक्षा व्यवस्था नहीं हो सकती, तो वह अपने लिए भी कोई विशेष सुविधा नहीं लेना चाहते.
नए सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया
नए सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए डॉ.अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि ईरान के संविधान के अनुसार अगर सुप्रीम लीडर किसी कारण से अपना पद नहीं संभाल पाते, तो अस्थायी रूप से तीन लोगों की एक परिषद जिम्मेदारी संभालती है. इसमें राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख और गार्डियन काउंसिल का एक जुरिस्ट शामिल होता है. इसके बाद स्थायी सुप्रीम लीडर का चुनाव विशेषज्ञों की सभा की तरफ से किया जाता है.
यह परिषद 88 सदस्यों की होती है और इसके सदस्य जनता की तरफ से चुनाव के माध्यम से चुने जाते हैं. यही परिषद नए सुप्रीम लीडर के नाम पर चर्चा करती है और मतदान के जरिए फैसला लेती है.


