ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का असर अब भारत के शहरों तक भी महसूस होने लगा है. हैदराबाद के बाज़ारों में इस बार रमज़ान के दौरान पहले जैसी रौनक दिखाई नहीं दे रही. आमतौर पर रमज़ान के महीने में शहर के बाजार देर रात तक खुले रहते हैं, खाने की खुशबू से गलियां भर जाती हैं और रोज़ेदार इफ्तार के बाद सेहरी तक होटलों और स्टालों पर जुटे रहते हैं, लेकिन इस बार कई इलाकों में बाजार पहले की तुलना में काफी शांत दिखाई दे रहे हैं.
व्यापारियों और होटल मालिकों का कहना है कि युद्ध के असर से अचानक कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हुई है. गैस की कमी की वजह से कई होटलों के किचन का काम प्रभावित हुआ है. रमज़ान के दौरान जहां आमतौर पर होटल रात भर सेहरी के लिए खाना तैयार करते हैं, वहीं अब कई जगह लकड़ी के चूल्हों पर खाना बनाना पड़ रहा है. इससे खाना बनाने में ज्यादा समय लग रहा है और उतनी मात्रा में भोजन तैयार करना भी मुश्किल हो रहा है.
हैदराबाद के होटल मालिकों का बयान
हैदराबाद के होटल मालिकों का कहना है कि रमज़ान का महीना उनके कारोबार के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है. इसी महीने में सबसे ज्यादा ग्राहक आते हैं और अच्छी कमाई होती है. लेकिन इस बार गैस की कमी के कारण स्थिति बदल गई है. कई होटल मालिकों का कहना है कि वे पूरी कोशिश कर रहे हैं कि रोज़ेदारों को सेहरी मिल सके, लेकिन सीमित साधनों के कारण हर किसी तक भोजन पहुंचाना आसान नहीं हो रहा. बाजारों में आने वाले लोगों का भी कहना है कि उन्हें पहले की तरह आसानी से खाना नहीं मिल पा रहा. कुछ लोग देर रात तक सेहरी की तलाश में इधर-उधर जाते दिखाई दे रहे हैं. रमज़ान का महीना रोज़ा, इबादत और सब्र का समय माना जाता है, लेकिन इस बार कई लोगों को जरूरी चीजों की कमी का सामना भी करना पड़ रहा है.
हैदराबाद के कारोबारियों का बुरा हाल
हैदराबाद के स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव और युद्ध का असर कभी-कभी आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ता है. ऐसे समय में सप्लाई व्यवस्था को बनाए रखना और जरूरी सेवाओं को जारी रखना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है, ताकि लोगों को कम से कम परेशानी हो.


