केंद्र सरकार ने डिजिटल दुनिया के बड़े खिलाड़ियों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने IT Rules 2021 में नए और सख्त प्रावधान जोड़ते हुए साफ संकेत दे दिया है कि अब सोशल मीडिया, टेक और डिजिटल प्लेटफॉर्म मनमानी नहीं कर पाएंगे. ये बदलाव खास तौर पर Intermediary यानी उन कंपनियों के लिए हैं जो यूजर और कंटेंट के बीच बिचौलिए की भूमिका निभाती हैं.
आसान भाषा में समझें तो Intermediary वो प्लेटफॉर्म हैं, जहां आप कुछ पोस्ट करते हैं और वह दूसरे लोगों तक पहुंचता है. व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप. फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म. गूगल और यूट्यूब जैसे सर्च और वीडियो प्लेटफॉर्म, अमेज़न-फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स और नेटफ्लिक्स-प्राइम जैसे ओटीटी ये सभी इसी दायरे में आते है. आप जहां भी ऑनलाइन एक्टिव हैं वो लगभग सब इस नियम के अंदर आता है.
डेटा को लेकर अब कोई ढील नहीं
सरकार ने साफ कर दिया है कि अब यूजर डेटा को लेकर किसी तरह की ढिलाई नहीं चलेगी. पहले नियम थोड़े अस्पष्ट थे, लेकिन अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी भी कानून के तहत डेटा को सुरक्षित रखना और तय समय तक संभाल कर रखना अनिवार्य होगा. कंपनियां अब डेटा हटाने या नजरअंदाज करने के नाम पर बच नहीं पाएंगी. इस संशोधन का सबसे अहम हिस्सा वही है, जो पूरी तस्वीर बदल देता है. अब अगर मंत्रालय किसी भी Intermediary को कोई निर्देश, सलाह, SOP या गाइडलाइन देता है तो उसे मानना अनिवार्य होगा.
पहले कंपनियां इसे एडवाइजरी कहकर टालने की कोशिश करती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा. सरकार को भी यह जिम्मेदारी दी गई है कि हर आदेश लिखित में हो, उसमें कानूनी आधार साफ लिखा हो और यह भी बताया जाए कि वह किस पर और कैसे लागू होगा. सबसे बड़ी बात अब इन आदेशों का पालन करना “ड्यू डिलिजेंस” का हिस्सा होगा. यानी अगर कंपनी ने आदेश नहीं माना तो IT Act की धारा 79 के तहत मिलने वाली “सेफ हार्बर” सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. अब प्लेटफॉर्म यह नहीं कह पाएंगे कि यूजर ने पोस्ट किया तो यह हमारी जिम्मेदारी नहीं है.
न्यूज और सोशल मीडिया कंटेंट पर भी सख्ती
एक और बड़ा बदलाव रूल 8 में किया गया है, जिसके तहत अब न्यूज और करंट अफेयर्स से जुड़ा कंटेंट भी सख्त निगरानी में आएगा. अब ये नियम सिर्फ न्यूज पब्लिशर्स तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि उन प्लेटफॉर्म्स पर भी लागू होंगे, जहां आम यूजर इस तरह का कंटेंट शेयर करता है. यानी अगर कोई यूजर व्हाट्सएप पर न्यूज फॉरवर्ड करता है या फेसबुक पर कोई खबर शेयर करता है तो उस प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी भी तय होगी.
शिकायतों पर अब सिस्टमेटिक कार्रवाई
सरकार ने शिकायत निपटाने की व्यवस्था को भी मजबूत किया है. अब एक कमेटी नियमित रूप से बैठकर उन मामलों को सुनेगी, जहां कोड ऑफ एथिक्स का उल्लंघन हुआ है या जहां समय पर फैसला नहीं हुआ. इसके साथ ही मंत्रालय खुद भी मामलों को इस कमेटी के पास भेज सकता है. एक अहम बदलाव यह भी है कि अब यह कमेटी सिर्फ शिकायतों को स्वीकार या खारिज नहीं करेगी बल्कि सीधे मंत्रालय को सिफारिशें भी देगी.
आम आदमी के लिए इसका मतलब क्या है?
इन नियमों का असर सिर्फ कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आम यूजर की डिजिटल जिंदगी भी बदलेगी. अब सोशल मीडिया पर कुछ भी शेयर करने से पहले लोग ज्यादा सोचेंगे, क्योंकि प्लेटफॉर्म पर जिम्मेदारी बढ़ने का मतलब है कि कंटेंट पर नजर भी सख्त होगी.
सरकार बनाम टेक कंपनियां
यह संशोधन IT Rules 2021 का एक और बड़ा अपडेट है और इससे सरकार को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सीधा नियंत्रण लागू करने की ताकत मिलती है. सरकार इसे फेक न्यूज, हेट स्पीच और सुरक्षा से जोड़कर देख रही है, जबकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे सरकार की सीधी पकड़ बढ़ेगी और कंपनियों की स्वतंत्रता कम होगी. मेटा, गूगल और एक्स जैसी कंपनियों के लिए यह सिर्फ नियम नहीं बल्कि एक नई चुनौती है. खासकर भारत जैसे बड़े बाजार में.
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