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भारत करने जा रहा 1 लाख करोड़ की मेगा डील, खरीदेगा ऐसी मेगा सबमरीन
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भारत करने जा रहा 1 लाख करोड़ की मेगा डील, खरीदेगा ऐसी मेगा सबमरीन

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Indian Navy: भारत अपनी नौसेना की अंडरवाटर क्षमता को दोगुना करने के लिए दो बड़ी पनडुब्बी डील अंतिम रूप देने जा रहा है, जिनकी कुल लागत 1.06 लाख करोड़ रुपये से अधिक है.  यह कदम चीन की बढ़ती समुद्री ताकत और हिंद महासागर में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने के मद्देनजर उठाया गया है. उम्मीद है कि दोनों डील अगले साल के मध्य तक फाइनल हो जाएंगी.

पहली डील: तीन स्कॉर्पीन पनडुब्बियां

पहली डील प्रोजेक्ट 75 का फॉलो ऑन ऑर्डर है, जिसमें तीन नई स्कॉर्पीन पनडुब्बियां मुंबई के मझगांव डॉक लिमिटेड (MDL) और फ्रांस की नेवल ग्रुप के सहयोग से बनेंगी. इनकी अनुमानित लागत लगभग 36,000 करोड़ रुपये है. ये पनडुब्बियां 1500 टन वजनी और 75 मीटर लंबी होंगी, एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम से लैस, और 21 दिनों तक पानी के नीचे रह सकती हैं. हथियारों में टॉरपीडो, एंटी शिप मिसाइल और माइन शामिल हैं. पुरानी रूसी किलो क्लास पनडुब्बियों को बदलते हुए ये हिंद महासागर में नौसेना की ताकत बढ़ाएंगी.

तकनीकी और व्यावसायिक मुद्दों के कारण डील में दो साल से देरी हुई है. हालांकि कॉन्ट्रैक्ट अगले साल की शुरुआत में साइन होने की उम्मीद है और पहली पनडुब्बी की डिलीवरी साइन के छह साल बाद होगी.

दूसरी डील: छह डीजल इलेक्ट्रिक स्टेल्थ पनडुब्बियां

दूसरी डील प्रोजेक्ट 75 इंडिया (P-75I) है, जिसमें छह नई स्टेल्थ पनडुब्बियां बनाई जाएंगी. इसकी अनुमानित लागत लगभग 65,000- 70,000 करोड़ रुपये है. इस डील के तहत MDL और जर्मनी की TKMS मिलकर पनडुब्बियां तैयार करेंगे.

ये पनडुब्बियां 3000 टन वजनी होंगी, AIP सिस्टम और स्टेल्थ डिजाइन से लैस होंगी, और एडवांस्ड सेंसर्स तथा हथियारों से युक्त होंगी. इनसे पुरानी शिशुमार और सिंधुघोष क्लास पनडुब्बियों का स्थान भरा जाएगा. टेंडर की सख्त शर्तों और महंगाई व मुद्रा उतार चढ़ाव के कारण डील में देरी हुई. कॉन्ट्रैक्ट 6 9 महीने में होने की संभावना है, जबकि पहली डिलीवरी सात साल बाद होगी और बाकी पनडुब्बियां सालाना दी जाएंगी.

भारत की नौसेना की बढ़ेगी

इन डीलों से भारत की नौसेना की अंडरवाटर ताकत दोगुनी होगी और हिंद महासागर में चीन के खिलाफ रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी. यह ‘मेक इन इंडिया’ परियोजना भी है, जिससे देश की नौसैनिक उद्योग क्षमता और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी.



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