प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (14 फरवरी, 2026) को असम के डिब्रूगढ़ जिले में मोरान में नेशनल हाईवे पर बने इमरजेंसी लैंडिंग फेसिलिटी (ELF) पर भारतीय वायुसेना के C-130J विमान से एक हाई-प्रोफाइल लैंडिंग की. पीएम मोदी की इस लैंडिंग के बाद भारतीय वायुसेना ने चीन सीमा के नजदीक बने ELF पर राफेल, सुखोई जैसे अपने लड़ाकू विमानों को भी उतारा है.
मोरान में वायुसेना की ताकत में इजाफा करने वाले इस ELF के निर्माण को स्ट्रैटेजिक एक्सपर्ट्स ने भारत की एयरपॉवर डॉक्ट्रिन में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत करार दिया है. उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान में हुए ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख का नतीजा है.
देश में 28 ELF किए जा रहे विकसितः चेलानी
रणनीतिक विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि मोरान नेशनल हाईवे पर बना ये एयरस्ट्रिप देशभर में बनाए जा रहे 28 इमरजेंसी लैंडिंग फेसिलिटी (ELF) में से एक है. जिसका मुख्य उद्देश्य इस बात को सुनिश्चित करना है कि अगर किसी युद्ध की स्थिति में दुश्मन भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयरबेस को अपना निशाना बनाता है, तब भी वायुसेना अपने ऑपरेशन को निरंतर जारी रख सके.
Modi’s high-profile landing on a national highway in Moran, Assam — one of 28 Emergency Landing Facilities (ELFs) being built across India — highlights a quiet but consequential shift in India’s airpower doctrine: the creation of real operational redundancy. The aim is to ensure…
— Dr. Brahma Chellaney (@Chellaney) February 14, 2026
उन्होंने कहा कि यह रणनीति हवाई युद्ध के एक मूल सिद्धांत पर आधारित है, जिसके मुताबिक, जब भी कोई हवाई हमले शुरू होता है, तो आमतौर पर सबसे पहले दुश्मन के एयर डिफेंस और एयरफील्ड्स को ही निशाना बनाया जाता है. ऐसे में अगर कभी वायुसेना के एयरबेस क्षतिग्रस्त होते हैं, तो इसके दूसरे विकल्प के तौर पर रनवे और ऑपरेशनल ठिकाने बेहद जरूरी हो जाते हैं.
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर क्या बोले एक्सपर्ट?
पाकिस्तान में हुए ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए डॉ. चेलानी ने कहा कि भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मिले राजनीतिक निर्देशों के कारण अपने हमलों को सिर्फ आतंकी ठिकानों तक ही सीमित रखा था. जिसे बाद में देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) ने माना कि शुरुआत में विमान को नुकसान पहुंचना एक रणनीतिक गलती थी, जिसे सरकार की ओर से दुश्मन के एयर डिफेंस और एयरबेस पर हमला करने की अनुमति मिलने के बाद संघर्ष के तीसरे और आखिरी दिन सुधारा गया.
उन्होंने कहा कि पूरे भारत में विकसित हो रहे ये रोड-रनवे भारत की रक्षा तैयारियों को नई मजबूती दे रहे हैं. ये सुविधाएं रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण सीमावर्ती इलाकों, तटीय क्षेत्रों और संवेदनशील स्थानों के पास बनाई जा रही हैं. इनका निर्माण विशेष रूप से मजबूत कंक्रीट से किया गया है, जो 74 टन के वजन वाले ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और फाइटर जेट के आफ्टरबर्नर की गर्मी को भी सहन कर सकता है.
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि इन ELF में बेसिक एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम और पार्किंग एप्रन जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं, जिससे ये सीमित संसाधनों के बावजूद पूरी तरह से उपयोगी अस्थायी एयरस्ट्रिप के तौर पर काम कर सकते हैं.


