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यूपी, बंगाल से लेकर तमिलनाडु तक, भारत-EU ट्रेड डील से किस राज्य को होगा कितना फायदा
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यूपी, बंगाल से लेकर तमिलनाडु तक, भारत-EU ट्रेड डील से किस राज्य को होगा कितना फायदा

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भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की चर्चा दुनियाभर में है. इस डील ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ नीति की बुनियाद हिला कर रख दी है. दोनों पक्षों ने इसे मदर ऑफ ऑल डील करार दिया है. वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक इस डील के बाद भारत से यूरोपीय यूनियन को होने वाले निर्यात में 6.4 लाख करोड़ की बढ़ोतरी होने की संभावना है.

भारत में 6,000 यूरोपीय संघ की कंपनियां मौजूद हैं. सभी देशों से कुल फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) में से 16.5 फीसदी से अधिक एफडीआई का योगदान रहा. अप्रैल 2000 से मार्च 2024 तक यूरोपीय यूनियन को भारत से करीब 40.04 अरब अमेरिकी डॉलर का एफडीआई हुआ.

इस डील के तहत 9,425 प्रोडक्ट्स से टैरिफ हटाने और रेगुलेटरी एक्सेस को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी. इससे कृषि निर्यात, कपड़ा, चमड़ा, ज्वेलरी निर्यात के लिए नए अवसर खुलेंगे. यूरोपीय यूनियन के साथ हुई इस डील से भारत के अलग-अलग राज्यों को फायदा मिलने की उम्मीद है.

महाराष्ट्र का क्या फायदा होगा?

भारत-यूरोपीय यूनियन के बीच हुई इस डील से कपड़ा उद्योग पर लगने वाला 12 फीसदी टैरिफ खत्म हो जाएगा. इसके अलावा इलेक्ट्रोनिक्स सामानों पर लगने वाला 14 फीसदी शुल्क हट जाएगा. इसका फायदा इचलकरंजी का गारमेंट क्लस्टर और पुणे के इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा हब को होगा. इस सेक्टर से अब यूरोपीय यूनियन को निर्यात बढ़ाया जा सकता है. रायगढ़-ठाणे की फार्मा यूनिट और मुंबई के ज्वैलरी व्यापारियों को भी इसका फायदा मिलेगा.

गुजरात में इस सेक्टर का होगा फायदा

गुजरात के एक्सपोर्ट इंडस्ट्रियल सेक्टर को इंटीग्रेटेड सप्लाई चेन के माध्यम से लाभ मिल रहा है. इस डील से सूरत में कपड़ा, हीरे और आभूषणों के निर्यात में विस्तार की संभावना है. भरूच और वडोदरा क्षेत्र का भी फायदा होगा क्योंकि 97.5 फीसदी कैमिकल उत्पादों पर अब शुल्क 12.8 फीसदी हो जाएगा. राजकोट से इंजीनियरिंग सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स तथा वेरावल से समुद्री निर्यात में भी वृद्धि होने की उम्मीद है.

तमिलनाडु
तमिलनाडु के तिरुप्पुर के टेक्सटाइल इंडस्ट्री को इस ट्रेड डील से मजबूती मिलने की उम्मीद है क्योंकि इस पर लगने वाला 12 फीसदी टैरिफ को हटा दिया गया है. वेल्लोर-अंबूर के चमड़े और जूते के व्यापारियों का फायदा होगा क्योंकि इस पर लगने वाला 17 फीसदी शुल्क हटा दिया गया. चेन्नई और कोयंबटूर में इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरिडोर और मजबूत होगा.

पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल को होने वाले लाभ आजीविका से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं. उत्तरी बंगाल से दार्जिलिंग चाय के निर्यात को यूरोपीय संघ में बेहतर पहुंच मिलेगी. दीघा और हल्दिया से सी फूड को यूरोपीय बाजार में जगह मिलेगी, जिस पर अब तक 26 फीसदी शुल्क लगता था. पारंपरिक हस्तशिल्प को भी बेहतर बाजार पहुँच से फायदा होगा.

असम
असम को चाय, मसालों और हैंडीक्राफ्ट उत्पादों के निर्यात से लाभ होता है. डिब्रूगढ़-जोरहाट की चाय और ऊपरी असम के मसाले यूरोपीय संघ के प्रीमियम बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ा सकते हैं. बारपेटा और नलबाड़ी के बांस से बने फर्नीचर और हस्तशिल्प, साथ ही विशिष्ट औषधियों के निर्यात को भी बाजार में आसानी से प्रवेश मिलने से फायदा होगा.

केरल
केरल को किसानों और मछुआरों की आय से जुड़े समुद्री और मसालों के निर्यात से लाभ होता है. सरकारी अधिकारियों के अनुसार, कोच्चि और अलाप्पुझा झींगा और टूना मछली के निर्यात को बढ़ा सकते हैं, जबकि इडुक्की और वायनाड से काली मिर्च और इलायची को यूरोपीय संघ के बाजार तक पहुंच मिलेगी.

कर्नाटक
बेंगलुरु-तुमकुरु से इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स के निर्यात में MSME आपूर्तिकर्ताओं के सहयोग से तेजी आएगी. बेंगलुरु से गारमेंट्स निर्यात में भी विस्तार होने की संभावना है, जिससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश रोजगार सृजन का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है. कानपुर और आगरा से चमड़े के जूते, सहारनपुर से फर्नीचर और हैंडीक्राफ्ट, नोएडा से इलेक्ट्रॉनिक्स और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से कृषि उत्पादों के निर्यात से इन सभी को लाभ मिलने की संभावना है.

राजस्थान
जयपुर के आभूषण, जोधपुर के लकड़ी के फर्नीचर और हैंडीक्राफ्ट, साथ ही खेल के सामान, कपड़े और चमड़े के उत्पादों की यूरोपीय संघ में मांग बढ़ने की उम्मीद है.

पंजाब
पंजाब में MSME-प्रधान क्षेत्रों को लाभ मिल रहा है. लुधियाना से कपड़े और बुनाई के सामान, जलंधर से खेल के सामान और मंडी गोविंदगढ़ से हल्के इंजीनियरिंग उत्पादों की यूरोपीय संघ में मांग बढ़ने की उम्मीद है.



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