इंडिया एनर्जी वीक 2026 (IEW’26) के अवसर पर भारत और कनाडा के बीच ऊर्जा सहयोग को एक नई दिशा मिली. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के निमंत्रण पर कनाडा के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री टिमोथी हॉजसन ने गोवा में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक 2026 में भाग लिया. यह IEW में किसी कनाडाई कैबिनेट मंत्री की पहली उच्चस्तरीय भागीदारी रही.
कार्यक्रम के इतर दोनों मंत्रियों के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसमें भारत–कनाडा मंत्रीस्तरीय ऊर्जा संवाद (India-Canada Ministerial Energy Dialogue) के नवीनीकृत संस्करण का औपचारिक शुभारंभ किया गया. इस दौरान दोनों पक्षों ने ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति की विविधता को दोनों देशों की सुरक्षा, जनकल्याण और आर्थिक मजबूती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया.
कनाडा जी7 समिट में प्रधानमंत्रियों की वार्ता के क्रम में हुई बैठक
यह बैठक जून, 2025 में कनाडा के काननास्किस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और कनाडा के प्रधानमंत्रियों के बीच हुई बातचीत के क्रम में हुई, जिसमें वरिष्ठ मंत्रीस्तरीय और कार्यस्तरीय संवाद को पुनः आरंभ करने पर सहमति बनी थी.
भारत-कनाडा ने स्वीकारा सहयोग से दोनों से मिल सकता है लाभ
दोनों देशों के मंत्रालयों ने यह स्वीकार किया कि भारत और कनाडा के ऊर्जा क्षेत्र एक-दूसरे के पूरक हैं और दीर्घकालिक सहयोग से दोनों को आपसी लाभ मिल सकता है. कनाडा ने स्वच्छ और पारंपरिक ऊर्जा दोनों क्षेत्रों में एनर्जी सुपरपावर बनने का लक्ष्य रखा है, वहीं भारत वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य का केंद्र बिंदु बनकर उभर रहा है. कनाडा के पास उभरती हुई एलएनजी परियोजनाएं हैं, एशियाई बाजारों के लिए कच्चे तेल का निर्यात बढ़ाया जा रहा है और पश्चिमी तट से एलपीजी निर्यात को भी गति दी जा रही है.
भारत प्राकृतिक गैस में हिस्सेदरी बढ़ाने की दिशा में कर रहा प्रयास
वहीं, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता, चौथा सबसे बड़ा LNG आयातक, तीसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता और चौथी सबसे बड़ी रिफाइनिंग क्षमता वाला देश है. अनुमान है कि आने वाले दो दशकों में वैश्विक ऊर्जा मांग में होने वाली वृद्धि का एक-तिहाई से अधिक योगदान भारत का होगा. इसके साथ ही, भारत घरेलू तेल उत्पादन बढ़ाने, रिफाइनिंग क्षमता का विस्तार करने और ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है. ऐसे में दोनों देशों के बीच ऊर्जा ईंधन के क्षेत्र में मजबूत साझेदारी की व्यापक संभावनाएं हैं.
इस संदर्भ में मंत्रियों ने कनाडा से भारत को LNG, LPG और कच्चे तेल की आपूर्ति और भारत से कनाडा को परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने पर सहमति जताई. दोनों पक्षों ने ऊर्जा क्षेत्र में संयुक्त वाणिज्यिक और निवेश साझेदारियों के महत्व को भी रेखांकित किया.
कनाडा सरकार ने 116 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की घोषणा की थी
कनाडा सरकार ने साल 2025 में मेजर प्रोजेक्ट्स ऑफिस की शुरुआत करते हुए 116 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के ऊर्जा और संसाधन निवेश की घोषणा की थी. वहीं, भारत ने भी ऊर्जा क्षेत्र की संपूर्ण वैल्यू चेन में करीब 500 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश अवसरों को रेखांकित किया. दोनों देशों ने दीर्घकालिक साझेदारी के माध्यम से परस्पर निवेश को बढ़ावा देने का संकल्प दोहराया.
जलवायु परिवर्तन और उत्सर्जन में कमी के लक्ष्यों पर जताई प्रतिबद्धता
जलवायु परिवर्तन और उत्सर्जन में कमी के लक्ष्यों को लेकर भी दोनों मंत्रियों ने साझा प्रतिबद्धता जताई. इसमें कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण जैसी तकनीकों के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के विकास और तैनाती पर जोर दिया गया. नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोजन, बायोफ्यूल्स, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल, बैटरी स्टोरेज, क्रिटिकल मिनरल्स, स्वच्छ तकनीक, बिजली प्रणाली, ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और ऊर्जा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं बताई गईं.
ऊर्जा सुरक्षा और विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं के महत्व को दोनों देशों ने दोहराया
दोनों पक्षों ने ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस (GBA) के माध्यम से वैश्विक ऊर्जा संक्रमण को आगे बढ़ाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया, जिसमें कनाडा पर्यवेक्षक के रूप में शामिल है.
बैठक के अंत में भारत और कनाडा ने ऊर्जा सुरक्षा और विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं के महत्व को दोहराते हुए सरकार-से-सरकार संवाद, विशेषज्ञ स्तर पर सहयोग, व्यापारिक साझेदारियों और बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. यह साझेदारी न केवल दोनों देशों बल्कि वैश्विक समुदाय के लिए भी सुरक्षित, टिकाऊ और विश्वसनीय ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
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