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‘थोड़ा नर्वस हूं’, इंडिया गठबंधन के नेताओं से बोले उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी
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‘थोड़ा नर्वस हूं’, इंडिया गठबंधन के नेताओं से बोले उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी

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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस और इंडिया ब्लॉक के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी ने बुधवार (20 अगस्त, 2025) को संसद के सेंट्रल हॉल में इंडिया गठबंधन के नेताओं संग कई मुद्दों पर चर्चा की. इस दौरान उन्होंने कहा कि मुझे राम मनोहर लोहिया द्वारा कहा गया एक वाक्य याद आता है कि जब सड़क खामोश हो तो सदन आवारा होती है. 

लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की तारीफ करते हुए रेड्डी ने कहा कि वो (राहुल गांधी) सड़कों पर सन्नाटा नहीं होने देते. यह उनका स्वभाव और आदत बन गई है और एक के बाद एक चुनौतियों का सामना करना उनकी यात्रा का हिस्सा है. 

‘जब सड़क खामोश होती है तो संसद आवारा हो जाती है’
बी. सुदर्शन रेड्डी ने कहा कि मैं थोड़ा नर्वस हूं, शायद थोड़ा उत्साहित भी हूं और थोड़ा रोमांचित भी. मेरी खुशी का ठिकाना नहीं है, जब आप विभिन्न मुद्दों पर राष्ट्र को संबोधित करते हैं तो मैं आप सभी को अपनी-अपनी सीटों से सुनता रहता हूं. मैं आपमें से ज़्यादातर लोगों को शायद आपमें से हर एक को देश में क्या हो रहा है यह जानने के लिए फ़ॉलो करता हूं. उन्होंने आगे कहा कि चूंकि मैं उस विचारधारा से आया हूं इसलिए मुझे लोहिया जी की एक पंक्ति याद आ गई है, जब सड़क खामोश होती है तो संसद आवारा हो जाती है.

SIR के मुद्दे पर क्या बोले बी सुदर्शन रेड्डी  
पूर्व जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी ने बिहार में SIR का भी मुद्दा उठाया और कहा कि वोट देने का अधिकार जनता के हाथ में एकमात्र लोकतांत्रिक हथियार है. उन्होंने कहा कि मतदान के सार्वभौमिक अधिकार को चुनौतियां मिल रही हैं. बिहार जिस संकट का सामना कर रहा है, उससे ज़्यादा गंभीर चुनौती और संविधान के लिए कोई खतरा नहीं हो सकता. मतदान का अधिकार आम आदमी के हाथ में एकमात्र साधन या हथियार है जब इसे छीनने की कोशिश की जाएगी तो लोकतंत्र में क्या बचेगा.

‘उपराष्ट्रपति कार्यालय कोई राजनीतिक संस्था नहीं’
सुदर्शन रेड्डी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने उनसे पूछा था कि वह राजनीतिक दलदल में क्यों जा रहे हैं. उन्होंने जवाब दिया कि 1971 में एक वकील के तौर पर शुरू हुआ उनका सफर जारी है और मौजूदा चुनौती उसी सफर का हिस्सा है. साथ ही उन्होंने कहा कि भारत के उपराष्ट्रपति का कार्यालय कोई राजनीतिक संस्था नहीं है.

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