राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को लखनऊ में एक बयान दिया है. भागवत ने भारतीय मुसलमानों की घर वापसी और हिंदू समुदाय के लोगों को तीन बच्चे पैदा करने की नसीहत दी है. साथ ही कहा है कि यूजीसी नियम किसी के खिलाफ नहीं है. मोहन भागवत लखनऊ के निराला नगर के सरस्वती शिशु मंदिर में सामाजिक सद्भाव बैठक में बोल रहे थे. इस दौरान उन्होंने हिंदू समाज को संगठन और सशक्त करने की बात को फिर से दोहराया है. साथ ही कहा कि हमें किसी से खतरा नहीं है, लेकिन हमें सावधान रहने की जरूरत है.
हिंदुओं की घटती जनसंख्या चिंता का विषय: भागवत
उन्होंने कहा कि हिंदुओं की घटती जनसंख्या एक चिंता का विषय है. साथ ही जबरदस्ती और लालच देकर किए जा रहे धर्मांतरण पर रोक लगाने की बात कही है. उन्होंने कहा कि घर वापसी का काम तेज होना चाहिए. जो लोग हिंदू धर्म में लौटे हैं, उनका ध्यान भी हमें रखना होगा. इसके अलावा उन्होंने घुसपैठ पर भी चिंता जाहिर की.
उन्होंने कहा कि घुसपैठियों को डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट करना होगा. उन्हें रोजगार नहीं देना है. हिंदुओं के कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए. इसके अलावा उन्होंने वैज्ञानिकों का हवाला देते हुए कहा कि जिस समाज में औसतन 3 बच्चे होते हैं, वो समाज भविष्य में समाप्त हो जाता है. यह बात हमारे परिवारों में नव दंपतियों को बताई जानी चाहिए. डॉ. भागवत ने कहा कि विवाह का उद्देश्य सृष्टि आगे चले, यह होना चाहिए, वासना पूर्ति नहीं. इसी भावना से कर्तव्य बोध आता है.
जातियां झगड़े का कारण नहीं बनना चाहिए: मोहन भागवत
इसके अलावा RSS चीफ ने यूजीसी कानून को लेकर भी अपनी बात रखी. उन्होंने एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि कानून सभी को मानना चाहिए. कानून गलत है, तो बदलाव का उपाय भी है. जातियां झगड़े का कारण नहीं बनना चाहिए. इसके अलावा उन्होंने कहा कि समाज में अपनेपन का भाव होगा, तो इस तरह की समस्या नहीं होगी. जो नीचे गिरे हैं, उन्हें झुककर ऊपर उठाना पड़ेगा. सभी अपने हैं, यह भाव मन में होना चाहिए. साथ ही कहा कि संघर्ष से नहीं, समन्वय से दुनिया आगे बढ़ती है. एक को दबाकर दूसरे को खड़ा करने का भाव नहीं होना चाहिए.
चीन और अमेरिका को लेकर भी चेताया
इसके अलावा मोहन भागवत ने अमेरिका और चीन जैसे देशों को लेकर भी चेताया. कहा कि कुछ लोग हमारी सद्भावना के विरुद्ध योजना बना रहे हैं. हमें सावधान रहना होगा. एक दूसरे के प्रति अविश्वास समाप्त करना होगा. एक दूसरे के दुख दर्द में शामिल होना होगा.


