दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा की 1975 में हुए बम धमाके में हत्या के मामले में सीबीआई को अपना स्पष्ट रुख बताने का आदेश दिया है. कोर्ट ने CBI से कहा है कि वह स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे और बताए कि वह मामले की दोबारा जांच (री-इन्वेस्टिगेशन) के पक्ष में है या नहीं.
दो दोषियों ने सजा के खिलाफ दाखिल की अपील
यह मामला उस अपील से जुड़ा है, जो 2014 में दोषी ठहराए गए दो लोगों ने अपनी सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में दाखिल की है. वहीं मिश्रा के परिवार ने भी कोर्ट से मांग की है कि मामले की दोबारा जांच कराई जाए क्योंकि उनका दावा है कि असली साजिशकर्ताओं को पहले ही क्लीन चिट दे दी गई थी.
दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई से मांगा जवाब
24 फरवरी की सुनवाई के दौरान CBI के वकील ने कोर्ट को बताया कि उन्हें मौखिक निर्देश मिले हैं कि एजेंसी 2014 के ट्रायल कोर्ट के फैसले का समर्थन करेगी, जिसमें पांच लोगों को दोषी ठहराया गया था. हालांकि कोर्ट ने कहा कि केवल मौखिक जानकारी पर्याप्त नहीं है और एजेंसी को अपना आधिकारिक रुख लिखित रूप में देना होगा. जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने निर्देश दिया कि जॉइंट डायरेक्टर स्तर के अधिकारी द्वारा स्टेटस रिपोर्ट अगली सुनवाई से कम से कम दो दिन पहले दाखिल की जाए. मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी.
1975 में हुए बम धमाके में तत्कालीन रेल मंत्री की हुई थी मौत
यह मामला बिहार के समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर हुए 1975 के बम धमाके से जुड़ा है, जिसमें तत्कालीन रेल मंत्री की मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य लोगों की भी जान गई और 18 लोग घायल हुए थे. शुरुआती जांच बिहार CID ने की थी, लेकिन कुछ ही दिनों में केस CBI को सौंप दिया गया था. करीब 40 साल बाद 2014 में दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इनमें से तीन की मौत हो चुकी है, जबकि बाकी दो ने खुद को बेगुनाह बताते हुए नई जांच की मांग का समर्थन किया है. हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को देखते हुए अब मामले में किसी भी तरह की तारीख या देरी की अनुमति नहीं दी जाएगी.


