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Expert View: मनरेगा की जगह ‘जी राम जी’, आखिर क्यों मचा बवाल? एक्सपर्ट से जानें इससे क्या बदलेगा
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Expert View: मनरेगा की जगह ‘जी राम जी’, आखिर क्यों मचा बवाल? एक्सपर्ट से जानें इससे क्या बदलेगा

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मनरेगा के स्थान पर नया कानून लाने की तैयारी के बीच भारी बवाल देखने को मिल रहा है. इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दल नाराज हैं. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की जगह नया विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ (विकसित भारत- जी राम जी) विधेयक, 2025 लाया जा रहा है. हालांकि योजना का सिर्फ नाम नहीं बदला जा रहा है बल्कि इस नए विधेयक में कई जरूरी नियमों को भी शामिल किया गया है, जिस पर एबीपी न्यूज ने राजनीतिक विशेषज्ञ रुमान हाशमी से बात की.

मनरेगा के मुद्दे पर एक्सपर्ट ने कहा कि सरकार का नाम बदलने का जुनून अब योजनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह उन प्रतीकों को भी बदलना चाहती है, जो आज भी भारत की पहचान बने हुए हैं. मनरेगा, सीधे तौर पर महात्मा गांधी के नाम, विचारों, सत्य, अहिंसा और सामाजिक न्याय से जुड़ा है.

महात्मा गांधी पूरी दुनिया के नैतिक और राजनीतिक आदर्श 

रुमान हाशमी ने कहा कि महात्मा गांधी आज भी केवल भारत के नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के नैतिक और राजनीतिक आदर्श माने जाते हैं. उनके अंतिम संस्कार में विदेशी प्रतिनिधिमंडल, राष्ट्राध्यक्ष और वैश्विक नेता शामिल हुए. दुनियाभर के विश्वविद्यालयों में आज भी गांधी से जुड़े अध्ययन केंद्र मौजूद हैं. नेल्सन मंडेला जैसे नेताओं ने खुले तौर पर स्वीकार किया कि वे गांधी के विचारों से प्रेरित थे. उन्होंने आगे कहा कि ऐसे में सवाल उठता है कि गांधी वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य हैं तो देश के भीतर उनसे जुड़ी योजनाओं के नाम बदलने की जरूरत क्यों महसूस की गई? यह केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि विचारधारात्मक दूरी का संकेत भी हो सकता है.

मोहन भागवत का बयान

हाल ही में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का एक बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि सत्य के स्थान पर अब सत्ता का शासन है. इस बयान को मनरेगा के नाम परिवर्तन से जोड़कर देखा जा रहा है. सवाल यह है कि अगर सत्य, अहिंसा और नैतिकता जैसे गांधीवादी मूल्य हाशिये पर जा रहे हैं तो क्या मनरेगा से गांधी का नाम हटाना उसी दिशा का एक और कदम है?

मनरेगा में बदलाव नाम से आगे की कहानी

रुमान हाशमी ने कहा कि अगर सरकार सिर्फ नाम बदलती तो शायद इतना विवाद न होता, लेकिन आलोचकों का कहना है कि नाम बदलने के साथ-साथ योजना की संरचना और आत्मा में भी बदलाव किए जा रहे हैं. सरकार ने मनरेगा में काम के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करने की बात कही है. यह कागज़ पर सकारात्मक लगता है, लेकिन ज़मीनी सवाल यह है कि क्या सभी राज्यों में वास्तव में 125 दिन का काम मिलेगा? क्या भुगतान समय पर होगा?

AI ऑडिट और GPS निगरानी

सरकार का तर्क है कि AI आधारित ऑडिट से धन के दुरुपयोग पर रोक लगेगी. GPS निगरानी से फर्जी हाजिरी खत्म होगी, लेकिन यहां एक बड़ा सवाल खड़ा होता है. मनरेगा से जुड़े करीब 8.3 करोड़ अकुशल श्रमिक हैं. क्या इन सभी की जीपीएस ट्रैकिंग होगी? क्या निगरानी केवल कार्यस्थल और कार्य समय (8–9 घंटे) तक सीमित रहेगी या फिर यह निजी जीवन में दखल का जरिया बन सकती है? अगर जिला स्तर का कोई अधिकारी इस निगरानी का प्रभारी होगा तो यह निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन सकता है.

मजदूरी, भुगतान और नया 15 दिन का नियम

सरकार ने मजदूरी को 250 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये तक करने की बात कही है, लेकिन इसके साथ एक नया नियम भी जोड़ा गया है. अगर काम 15 दिनों में पूरा नहीं होता तो मजदूरी का आंशिक भुगतान किया जाएगा. शेष भुगतान बाद में मिलेगा. इस पर एक्सपर्ट ने कहा कि यह नियम गरीब मजदूरों की आर्थिक सुरक्षा को कमजोर कर सकता है, क्योंकि उनकी रोजमर्रा की जरूरतें समय पर भुगतान पर निर्भर करती हैं.

फंडिंग पैटर्न में बदलाव

मनरेगा की सबसे बड़ी ताकत यह थी कि इसमें केंद्र सरकार 100% फंडिंग करती थी. अब नए ढांचे में केंद्र सरकार 60% और राज्य सरकार 40% फंडिंग करेगी. यह बदलाव बिहार, उत्तर प्रदेश जैसे पिछड़े राज्यों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है. दिल्ली, चंडीगढ़ जैसे केंद्र शासित क्षेत्रों में जहां 100% फंडिंग का वादा है, वहीं गरीब राज्यों पर 40% का बोझ डालना असमानता को और गहरा कर सकता है.

कांग्रेस, विपक्ष और शशि थरूर का अलग सुर

सरकार के फैसले पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने तीखी आपत्ति जताई है. प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं ने इसे गांधी के नाम और विचारों पर हमला बताया. हालांकि कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अलग रुख अपनाया. उनका कहना है कि नाम बदलना उतना बड़ा मुद्दा नहीं, लेकिन नीतिगत बदलाव दुर्भाग्यपूर्ण हैं. यही वजह है कि वे इस मुद्दे पर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से असहज नजर आए.

ये भी पढ़ें: Indian Currency: जिन तीन देशों की यात्रा पर हैं पीएम मोदी, उनमें से कौन भारतीयों को कर सकता है मालामाल, करेंसी कंपैरिजन जाने



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