केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों की कड़ी निंदा की है. सिरसा ने एबीपी न्यूज से कहा, ‘बांग्लादेश में जो हुआ वह बहुत दुखदाई है. वह केवल एक हिंदू की हत्या नहीं बल्कि मानवता की हत्या है, वह धर्म की हत्या है.’
बांग्लादेश में कट्टरवाद हिंदुओं का दुश्मन बन गया
मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, ‘जिस तरह हमारे भारत देश के लोग सभी धर्म का सम्मान करते हैं, वैसा बांग्लादेश में नहीं हो रहा है. हमारे ही देश के लोग जब विदेशी मुल्क में इस तरह से शिकार हों, तो इससे बड़ी घटना नहीं हो सकती है. यह सब कुछ कट्टरवाद करवा रहा है.’
भारत के इस्लामिक कट्टरवादियों ने घटना पर कुछ नहीं कहा
केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘मुझे इस बात का खेद है कि भारत के किसी भी इस्लामिक कट्टरवादी ने इस बात के ऊपर एक बार भी खेद नहीं जताया, इस बात का विरोध भी नहीं किया. इससे बहुत तकलीफ होती है. यह और ज्यादा बढ़ जाती है कि आप इस तरह का कट्टरवाद फैला रहे हैं. अगर किसी हिंदू को इस तरह से मार कर पीटा जाता है और लटका कर जला दिया जाता है, तो इससे ज्यादा भयानक कुछ नहीं है. यह इतना दर्दनाक है कि हम बोल भी नहीं सकते और अगर लोग उसका दुख भी ना जताएं उसका विरोध भी ना करें, यह और भी बहुत दुखदाई है.’
ईशनिंदा के आरोप में की थी दीपू की हत्या
18 दिसंबर 2025 की रात मयमनसिंह जिले के भालुका इलाके में कट्टरपंथी भीड़ ने ईशनिंदा का आरोप लगाकर दीपू को बेरहमी से पीटा और फिर उसके शव को आग के हवाले कर दिया. दीपू एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करता था, उस पर बिना किसी ठोस सबूत के धार्मिक भावना आहत करने का आरोप लगाया गया.
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, 27 साल के दीपूचंद्र दास पायनियर निटवेयर्स (BD) लिमिटेड नाम की गारमेंट फैक्ट्री में फ्लोर मैनेजर थे. वह हाल ही में सुपरवाइजर पद के लिए प्रमोशन की परीक्षा दे चुके थे. फैक्ट्री के सीनियर मैनेजर साकिब महमूद ने बताया कि दोपहर करीब 5 बजे कुछ वर्कर्स ने दीपू पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाकर फैक्ट्री के अंदर ही विरोध शुरू कर दिया. दीपु के भाई अपू चंद्र दास ने बताया कि दीपु का कई सहकर्मियों से पहले से विवाद चल रहा था. ये विवाद काम की स्थितियों, टारगेट और वर्कर्स के फायदे को लेकर थे.


