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‘रिश्ते सुधारने के लिए सिर्फ एक ट्वीट…’ ट्रंप-मोदी की ‘दोस्ती’ पर शशि थरूर ने कह दी बड़ी बात
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‘रिश्ते सुधारने के लिए सिर्फ एक ट्वीट…’ ट्रंप-मोदी की ‘दोस्ती’ पर शशि थरूर ने कह दी बड़ी बात

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कांग्रेस के सांसद और लेखक शशि थरूर ने अमेरिका और भारत के बीच हालिया ट्रंप- मोदी के दोस्ताना संवाद पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि केवल एक ट्वीट से द्विपक्षीय रिश्तों में आई दरारों का समाधान नहीं निकलेगा. थरूर के अनुसार, इस रिश्ते की सच्ची मरम्मत के लिए सतत संवाद, ठोस कदम और दीर्घकालीन रणनीति जरूरी है.

ट्रंप-मोदी के मैत्रीपूर्ण संदेश पर थरूर का दृष्टिकोण
शशि थरूर ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के “हमेशा मोदी के साथ दोस्त रहूंगा” और “भारत-अमेरिका का विशेष रिश्ता” जैसे बयान स्वागत योग्य हैं, लेकिन ये केवल रिश्ते सुधारने की शुरुआत हैं. थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व में ट्रंप द्वारा भारत और रूस को चीन के कब्जे में बताने जैसी टिप्पणियों ने भारत में गहरा आघात पहुंचाया था. ऐसे में सिर्फ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मैत्रीपूर्ण संदेश पर्याप्त नहीं हैं.

पिछले विवाद और गहरे जख्म
NDTV की वेबसाइट पर लिखे अपने ओपिनियन में थरूर ने रेखांकित किया कि ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ (50%) और व्यक्तिगत आलोचनाएं द्विपक्षीय रिश्तों में तनाव का मुख्य कारण बनीं. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता के बीच इन टिप्पणियों के खिलाफ गहरा आक्रोश व्याप्त है, जिसे जल्द ठीक नहीं किया जा सकता.

साझा हित ही स्थायी आधार
थरूर ने जोर दिया कि भारत और अमेरिका के रिश्तों की मजबूती केवल नेताओं के मैत्रीपूर्ण रिश्ते में नहीं, बल्कि संयुक्त सैन्य अभ्यास, तकनीकी सहयोग, लोकतांत्रिक मूल्य और भारत-वशिष्ट अमेरिकी समुदाय जैसे साझा हितों में निहित है. उन्होंने कहा कि ये आधार ही दीर्घकालिक साझेदारी को सुरक्षित रख सकते हैं. शशि थरूर का मानना है कि सच्चा समाधान सिर्फ ट्वीट्स से नहीं आएगा. इसके लिए नीति निर्धारकों और कूटनीतिज्ञों को प्रभावी कदम उठाने होंगे.

उन्होंने कहा कि जरूरी है संयुक्त समझौते, नियमित संवाद और ठोस रणनीति ताकि व्यक्तिगत नेताओं के अचानक बयानों से रिश्तों पर असर न पड़े.थरूर ने यह भी कहा कि राजनीति कभी स्थिर नहीं होती. ट्रंप के बयान हमेशा अप्रत्याशित और विरोधाभासी रहे हैं. ऐसे में सिर्फ एक सकारात्मक ट्वीट से रिश्तों की दरार भरना आसान नहीं. उन्हें दीर्घकालीन रणनीति, व्यावहारिक सहयोग और संस्थागत पहल के जरिए सुलझाना पड़ेगा.

दीर्घकालीन सोच की आवश्यकता- थरूर
शशि थरूर ने निष्कर्ष में यह सलाह दी कि भारत-अमेरिका संबंध एक बड़ी पारी की तरह हैं, जिसे धैर्य और समझदारी से खेलना होगा. उन्होंने कहा, “अब वक्त है व्यक्तिगत मतभेदों को दरकिनार कर साझा हितों के लिए काम करने का ताकि यह रणनीतिक साझेदारी भविष्य में और मजबूती से कायम रह सके.”



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