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संकट में फंसी इंडिगो को DGCA ने दी बड़ी छूट, नाइट-ड्यूटी नियम में ढील, शर्तें लागू
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संकट में फंसी इंडिगो को DGCA ने दी बड़ी छूट, नाइट-ड्यूटी नियम में ढील, शर्तें लागू

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देशभर में इंडिगो की उड़ानों के लगातार रद्द होने और भारी देरी से यात्रियों में गुस्सा बढ़ गया था. हज़ारों लोग हवाई अड्डों पर फंसे रहे और देश के एविएशन नेटवर्क पर इसका बड़ा असर पड़ा. इसी दबाव के बीच DGCA ने माना कि फ़ेज़-2 FDTL (Flight Duty Time Limitations) नियमों ने अचानक क्रू उपलब्धता को बहुत कम कर दिया है. इंडिगो नई गाइडलाइन के मुताबिक अपनी वास्तविक ज़रूरत का सही अनुमान लगाने में असफल रहा और इसी कारण देशभर में व्यापक ऑपरेशनल व्यवधान पैदा हुए. यात्रियों को कड़ी असुविधा होने के बाद DGCA ने फैसला लिया कि राष्ट्रीय हवाई नेटवर्क को स्थिर करने के लिए अस्थायी राहत देना जरूरी है.

इंडिगो ने DGCA को बताया कि FDTL के नए नियम लागू होने के बाद उसकी प्लानिंग और रोस्टरिंग उतनी मजबूत नहीं थी, जितनी होनी चाहिए थी. नाइट शिफ्ट ड्यूटी, रेस्ट टाइम और ड्यूटी अवर्स की नई गणना ने क्रू की उपलब्ध संख्या को अचानक गिरा दिया. एयरलाइन ने स्वीकार किया कि उसने पायलट्स और केबिन क्रू की आवश्यकता का गलत अनुमान लगाया और इसी वजह से कैंसिलेशन का सिलसिला तेज हो गया. इंडिगो ने आश्वासन दिया कि वह जल्द ही अतिरिक्त क्रू भर्ती करेगा ताकि आगे सभी नियमों का पूरी तरह पालन हो सके.

DGCA की तरफ से दी गई राहत

DGCA की तरफ से दी गई राहत दो विशेष नियमों से संबंधित है. पहला है Para 3.11, जो रात 12 बजे से सुबह 5 बजे तक की नाइट ड्यूटी को नियंत्रित करता है. दूसरा है Para 6.1.4, जिसमें उन उड़ानों पर रोक थी जो नाइट-ड्यूटी समय में प्रवेश करती हैं. इन दोनों नियमों में अस्थायी ढील मिलते ही इंडिगो को रात की उड़ानें बिना अत्यधिक प्रतिबंध के चलाने में आसानी होगी और क्रू उपयोगिता में भी सुधार होगा.

छूट 10 फरवरी 2026 तक प्रभावी रहेगी

यह छूट 10 फरवरी 2026 तक प्रभावी रहेगी, लेकिन इसके साथ कड़े निरीक्षण और निगरानी की शर्तें भी जोड़ी गई हैं. DGCA ने एयरलाइन को निर्देश दिया है कि हर 15 दिन में उसे प्रोग्रेस रिपोर्ट जमा करनी होगी, जिसमें क्रू उपयोगिता, उपलब्धता बढ़ाने के कदम, संचालन में हुए सुधार और नया रोस्टरिंग मॉडल शामिल होगा. साथ ही 30 दिनों के भीतर इंडिगो को एक विस्तृत रोडमैप जमा करना अनिवार्य है, जिसमें क्रू प्रबंधन, शेड्यूलिंग और रेगुलेशन अनुपालन के स्पष्ट निर्देश होने चाहिए. DGCA ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि FDTL के बाकी सभी नियमों का सख्ती से पालन करना होगा और किसी अन्य प्रावधान में कोई छूट नहीं दी जाएगी. स्थिति बिगड़ने या अनुपालन में कमी होने पर DGCA किसी भी समय राहत वापस ले सकता है. DGCA की यह अस्थायी राहत एयरलाइन उद्योग को फिलहाल कुछ संतुलन दे सकती है और आने वाले दिनों में यात्रियों को भी उड़ान रद्द होने से राहत मिलने की उम्मीद है.

अब नया प्रावधान क्या कहता है?
नए आदेश ने एयरलाइंस को काफी लचीलापन दिया है. अगर किसी पायलट या केबिन क्रू को छुट्टी दी गई है तो उसे साप्ताहिक आराम के बराबर माना जाएगा. इससे एयरलाइंस बिना रुकावट के रोस्टर तैयार कर सकेंगी और फ्लाइट शेड्यूल अधिक स्थिर रह पाएगा.

यात्रियों को कैसे मिलेगा फायदा?
नया बदलाव सीधे-सीधे यात्रियों को राहत देगा. अत्यधिक देरी और रद्द उड़ानों की घटनाएं कम होगी. एयरलाइंस अपने डेली ऑपरेशन को सामान्य गति पर ला पाएंगी, जिससे यात्रा का अनुभव फिर से सहज महसूस होगा.

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