दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से निपटने के उपायों में आने वाले समय में काफी बदलाव देखने को मिल सकता है. कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने सुप्रीम कोर्ट में कई दूरगामी उपाय रखे हैं. इनमें से सबसे अहम है- दिल्ली की सीमाओं पर एमसीडी टोल कलेक्शन के लिए गाड़ियों को रोका जाना बंद करना. इसकी बजाय रेडियो फ्रीक्वेंसी टैग और कैमरा आधारित व्यवस्था से टोल कलेक्शन करना.
कोर्ट ने पूछे थे उपाय
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या का दूरगामी समाधान चाहता है. इसके लिए वह नियमित सुनवाई करेगा. कोर्ट ने CAQM से दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण के लिए जिम्मेदार सभी कारकों की जानकारी देने को भी कहा था. जजों ने कहा था कि हर साल जाड़े में होने वाले प्रदूषण के लिए सिर्फ पराली जलाने वाले किसानों को जिम्मेदार ठहरा देना गलत है.
सबसे ज्यादा प्रदूषण गाड़ियों से
अब CAQM ने एक चार्ट कोर्ट में पेश किया है. इसके मुताबिक गाड़ियों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण के लिए जिम्मेदार सबसे अहम कारण है. इसके साथ ही उद्योगों और दूसरे कारणों से उत्पन्न होने वाले अन्य पार्टिकुलेट भी प्रदूषण में काफी ज्यादा योगदान करते हैं. पराली और दूसरे अवशेषों को जलाने से जाड़े में लगभग 20 प्रतिशत प्रदूषण होता है. गर्मियों में यह घटकर 12 प्रतिशत हो जाता है. गर्मियों में धूल के चलते लगभग 27 प्रतिशत प्रदूषण होता है.
CAQM की रिपोर्ट
CAQM ने कई श्रेणियों में दूरगामी उपाय कोर्ट में पेश किए हैं. इनमें धूल को कम करने, निर्माण को नियंत्रित करने, बेहतर सड़क बनाने और किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रोत्साहित करने जैसी बातें शामिल हैं. ट्रांसपोर्ट को लेकर CAQM ने यह उपाय सुझाए हैं :-
- दिल्ली-एनसीआर से प्रदूषणकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाए. उन्हें या तो स्क्रैप किया जाए या एनसीआर के बाहर भेज दिया जाए.
- प्रदूषण जांच व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सड़क पर चल रही गाड़ियों की रिमोट सेंसिंग उपकरणों के जरिए निगरानी.
- रैपिड रेल और मेट्रो रेल नेटवर्क का विस्तार. उन्हें आपस में जोड़ कर सड़क पर भीड़ कम करना.
- सार्वजनिक परिवहन के लिए लोकेशन आधारित ट्रैकिंग, रियल-टाइम यात्री सूचना प्रणाली
- हर यात्री को सार्वजनिक परिवहन की तरफ प्रोत्साहित करने के लिए अंतिम कोने तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना.
- इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति की समीक्षा और सुधार. पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप कराने के लिए वाहन मालिकों को अधिक प्रोत्साहन देना.
- ईवी चार्जिंग सुविधा का विस्तार. बैटरी बदलने की सुविधा देने वाले स्टेशन भी इसमें शामिल.
- वाहनों को ईवी में रेट्रोफिट करने की अनुमति.
- ई-बस और सीएनजी बसों के ज़रिए शहरी सार्वजनिक बस सेवा का विस्तार.
- लंबी दूरी के ट्रक और दूसरे कमर्शियल वाहनों को गैस पर ट्रांसफर करना. इसके लिए सीएनजी/एलएनजी ईंधन नेटवर्क विकसित करना.
- दिल्ली की सभी सीमाओं पर गाडियों को बिना रोके टोल कलेक्शन सुनिश्चित करना. इसके लिए कैमरों और ऑटोमैटिक RFID की प्रणाली विकसित करना.
- दिल्ली और उससे लगे शहरों- नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत के लिए इंटीग्रेटेड यातायात प्रबंधन प्रणाली बनाना.
- दिल्ली और एनसीआर में पार्किंग मैनेजमेंट व्यवस्था बनाना.
- 2000 सीसी और उससे अधिक क्षमता वाली डीज़ल कारों/एसयूवी से अधिक इनवायरमेंट सेस वसूलना.
- ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान, रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान, रिमोट सेंसिंग तकनीक और एआई आधारित निगरानी से ट्रांसपोर्ट नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना.
1 महीना बाद सुनवाई
चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने इन उपायों को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि पहले सभी पक्ष इनके बारे में चर्चा करें. इसके बाद कोर्ट को यह जानकारी दें कि इन्हे कितना और कब तक लागू किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने चार सप्ताह बाद अगली सुनवाई की बात कही है.
यह भी पढ़ें:-
‘और कितना सुखाओगे सुखना लेक को’, CJI सूर्यकांत ने चंडीगढ़ की झील पर चिंता जताते हुए कहा


