राबड़ी देवी से जुड़े कथित लैंड-फॉर-जॉब्स मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने CBI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई एक अप्रैल, 2026 तय की है. जस्टिस मनोज जैन ने राबड़ी देवी ने याचिका दाखिल कर रॉउज एवन्यू कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें ऐसे दस्तावेज देने से इनकार कर दिया गया था, जिन पर जांच एजेंसी ने अपने चार्जशीट में भरोसा नहीं किया है. राबड़ी देवी के वकील कहना है कि इन दस्तावेजों तक पहुंच मिलना जरूरी है, ताकि वे केस में गवाही देने वाले अहम गवाहों, खासकर सरकारी गवाह से ठीक तरह से जिरह कर सकें.
रॉउज एवन्यू कोर्ट ने राबड़ी देवी की अर्जी की थी खारिज
दरअसल, रॉउज एवन्यू कोर्ट ने 18 मार्च, 2026 को राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव की उस मांग को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने CBI द्वारा इस्तेमाल न किए गए दस्तावेजों की कॉपी देने की मांग की थी. ट्रायल कोर्ट का कहना था कि अभियुक्तों को ऐसे दस्तावेज पाने का कोई स्वतः अधिकार नहीं होता. जिन पर अभियोजन पक्ष ने भरोसा ही नहीं किया है.
अदालत ने यह भी साफ किया था कि आपराधिक मुकदमे की प्रक्रिया के मुताबिक पहले अभियोजन पक्ष अपने भरोसे वाले दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर गवाह पेश करता है. ऐसे में बहस से पहले सभी अनरिलाइड दस्तावेज देने की शर्त नहीं लगाई जा सकती.
सीबीआई ने लालू और उनके परिवार पर लगाया था गंभीर आरोप
यह मामला उस आरोप से जुड़ा है, जिसमें CBI का दावा है कि 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियां देने के बदले जमीन ली थी. जांच एजेंसी के मुताबिक, नौकरी पाने के इच्छुक लोगों या उनके रिश्तेदारों ने पटना समेत कई जगहों पर जमीन लालू यादव के परिवार या उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम बहुत कम कीमत पर ट्रांसफर की थी. हालांकि, यादव परिवार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इसे राजनीतिक साजिश बताया है. अब इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में एक अप्रैल, 2026 को सुनवाई होगी.
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