भारत के रक्षा क्षेत्र से आई खबर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के ट्वीट से सामने आया ग्राफ सरकारी उपलब्धि नहीं, बल्कि एक बड़े रणनीतिक बदलाव का संकेत है. रक्षा मंत्रालय और डिफेंस प्रोडक्शन डिपार्टमेंट के ग्राफ में साफ दिखता है कि भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट अब नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुका है और यह उछाल किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि सुनियोजित नीति और बदलते वैश्विक समीकरणों का असर है.
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. यह आंकड़ा अपने आप में ऐतिहासिक है, क्योंकि यह पिछले साल के मुकाबले 62% से ज्यादा की वृद्धि दिखाता है. 2021-22 में जहां यह आंकड़ा 12,814 करोड़ रुपये था, वहीं चार साल के भीतर इसमें करीब तीन गुना उछाल आया है.
आंकड़ों के पीछे छिपी असली कहानी
2022-23: 15,918 करोड़ रुपये
2023-24: 21,083 करोड़ रुपये
2024-25: 23,622 करोड़ रुपये
2025-26: 38,424 करोड़ रुपये
यानी भारत के रक्षा निर्यात ने सिर्फ एक साल में 14,802 करोड़ रुपये की छलांग लगाई है. यह उछाल सामान्य नहीं है. यह दिखाता है कि वैश्विक बाजार में भारत की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है.
‘आत्मनिर्भर रक्षा’ से ‘ग्लोबर सप्लायर’ तक का सफरः रक्षा मंत्री
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘इस तेजी के पीछे ‘आत्मनिर्भर रक्षा, मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड’ की एक स्पष्ट रणनीति काम कर रही है. ये सिर्फ सरकारी नारे नहीं, बल्कि भारत की रक्षा नीति की दिशा तय करने वाले मूल सिद्धांत बन चुके हैं. पहले भारत को दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातकों में गिना जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. सरकार ने नीतिगत सुधारों के जरिए एक्सपोर्ट प्रक्रिया को आसान किया, लाइसेंसिंग को सरल बनाया और निजी कंपनियों को भी रक्षा उत्पादन में शामिल किया.’
भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट में बढ़ोत्तरी पर बोले रक्षा मंत्री
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि को भारत की बढ़ती ग्लोबल क्रेडिबिलिटी से जोड़ा. उन्होंने कहा, ‘भारत के रक्षा निर्यात ने FY 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये का नया रिकॉर्ड बनाया है, जो पिछले साल के मुकाबले 62.66% की मजबूत बढ़ोत्तरी को दर्शाता है.’ उन्होंने कहा, ‘यह 14,802 करोड़ रुपये की बड़ी छलांग भारत की स्वदेशी क्षमताओं और उन्नत मैन्युफैक्चरिंग ताकत पर बढ़ते वैश्विक भरोसे को दर्शाती है.’
Under the inspiring leadership of PM Shri @narendramodi, India is scripting an impressive defence exports success story!
India defence exports have touched a new all time high with a record ₹38,424 crore in FY 2025-26. It marks a robust 62.66% growth over the previous fiscal.… pic.twitter.com/eAAh1PYX7e
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) April 2, 2026
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बदलाव को रेखांकित करते हुए कहा, ‘भारत एक प्रभावशाली रक्षा निर्यात सफलता की कहानी लिख रहा है.’ उन्होंने कहा, ‘इसमें एक और अहम बात है कि इस ग्रोथ में सार्वजनिक और निजी दोनों सेक्टर की बराबर भागीदारी है. DPSUs का योगदान 54.84% और निजी उद्योग का 45.16% रहा, जो एक सहयोगी और आत्मनिर्भर रक्षा इकोसिस्टम की ताकत को दिखाता है.’
हाई-टेक डिफेंस सिस्टम्स की बढ़ रही मांगः राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘ब्रह्मोस मिसाइल जैसी प्रणालियां भारत की तकनीकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर स्थापित कर रही हैं. दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका के कई देश भारतीय रक्षा उपकरणों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि रक्षा निर्यात केवल व्यापार नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी का आधार होता है.’
उन्होंने कहा, ‘सबसे दिलचस्प बात यह है कि पिछले एक दशक में भारत का रक्षा निर्यात 25 गुना से ज्यादा बढ़ा है. 2013-14 में जहां यह सिर्फ 686 करोड़ रुपये था, वहीं आज यह 38,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है. यह बदलाव साफ दिखाता है कि भारत अब वैश्विक रक्षा निर्माण हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘भारत अब 100 से ज्यादा देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है. इसमें अमेरिका, फ्रांस, आर्मेनिया, फिलीपींस, इटली और UAE जैसे देश शामिल हैं. यह भारत की बढ़ती तकनीकी विश्वसनीयता और रणनीतिक पहुंच को दर्शाता है.’
भारत के लंबे समय के लिए रक्षा निर्यातक बनने के संकेतः रजनीश
इस संबंध में जानें-मानें अर्थशास्त्री और चार्टर्ड अकाउंटेंट रजनीश कुमार ने कहा, ‘बदलाव साफ दिख रहा है. सरकार आत्मनिर्भरता, निर्यात और निजी क्षेत्र को रक्षा में तेजी से आगे बढ़ा रही है. दूसरी तरफ कई देश पारंपरिक सप्लायर्स के विकल्प तलाश रहे हैं. भारत की ताकत सरल है- किफायती, भरोसेमंद और पहले से परखी हुई रक्षा तकनीक. आगे चलकर फोकस ड्रोन, मिसाइल और एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी पर रहेगा.’
उन्होंने कहा, ‘दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और खाड़ी देश बड़े खरीदार बनेंगे. यह सिर्फ एक बार की उछाल नहीं, बल्कि संकेत है कि भारत लंबे समय के लिए गंभीर रक्षा निर्यातक बन रहा है. निर्यात में ब्रह्मोस मिसाइल, आर्टिलरी गन, रडार सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और पर्सनल प्रोटेक्टिव गियर जैसे हाई-टेक उत्पाद शामिल हैं. यह संकेत है कि भारत अब केवल बेसिक उपकरण नहीं, बल्कि एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी भी दुनिया को दे रहा है.’
भारत अब सिर्फ एक डिफेंस इंपोर्टर नहीं रहाः रजनीश
अर्थशास्त्री रजनीश कुमार ने कहा, ‘इस सफलता के पीछे आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसी नीतियों की बड़ी भूमिका है, जिन्होंने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया और आयात पर निर्भरता कम की. हालांकि, भारत अभी भी दुनिया के बड़े रक्षा आयातकों में शामिल है, लेकिन तेजी से उभरता निर्यात इसे एक मजबूत वैश्विक खिलाड़ी बना रहा है. DPSUs का योगदान 54.84% और निजी सेक्टर का 45.16% इस बात का संकेत है कि देश का रक्षा इकोसिस्टम अब संतुलित और तेजी से विकसित हो रहा है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘फिलहाल, तस्वीर साफ है कि भारत अब सिर्फ एक डिफेंस इंपोर्टर नहीं रहा. वह तेजी से एक बड़े एक्सपोर्टर के रूप में उभर रहा है. सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस आंकड़े को और बढ़ाकर भारत को दुनिया के टॉप डिफेंस एक्सपोर्टर्स में शामिल करना है. अगर मौजूदा रफ्तार बनी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि दुनिया के लिए भी रक्षा समाधान तैयार करेगा. अंत में, यह आंकड़ा सिर्फ 38,424 करोड़ रुपये नहीं है, यह भारत के आत्मविश्वास, क्षमता और बदलती वैश्विक पहचान का प्रतीक है.’
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