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भारत के बजट में फाइटर जेट्स के लिए 63,733 करोड़ रुपये अलॉट, जानें कौन-कौन से हथियार बनेंगे?
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भारत के बजट में फाइटर जेट्स के लिए 63,733 करोड़ रुपये अलॉट, जानें कौन-कौन से हथियार बनेंगे?

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भारत ने अपना रक्षा बजट एक लाख करोड़ रुपये और बढ़ा दिया है, जिससे पाकिस्तान के पसीने छूटने तो तय हैं. भारत ने सिर्फ फाइटर जेट्स और एयरो इंजन के लिए ही करीब 64 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. रविवार (1 फरवरी, 2026) को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया, जिसमें रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. बजट में हथियारों और सेना के मॉर्डनाइजेशन का भी खास ख्याल रखा गया है. 

सरकार ने रविवार को 2026-27 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 7,84,678 करोड़ रुपये आवंटित किए, जबकि पिछले साल के मुकाबले यह राशि 1 लाख करोड़ रुपये ज्यादा है. 2025-26 में डिफेंस के लिए  6,81,210 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे.

रक्षा बजट के तहत विमान और एयरो इंजन के लिए 63,733 करोड़ रुपये अलग रखे गए हैं, जबकि नौसेना बेड़े के लिए 25,023 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. सरकार ने 2025-26 में रक्षा बजट के लिए 6,81,210 रुपये आवंटित किए थे, जिसमें से पूंजीगत व्यय 1,80,000 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था, जो संशोधित अनुमान चरण में बढ़कर 1,86,454 करोड़ रुपये हो गया.

पिछले कुछ सालों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी हथियारों पर फोकस बढ़ाया है और रक्षा उत्पादन पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर है. रक्षा मंत्रालय के कई बड़े प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं और कई शुरू होने हैं, जिसके लिए यह नया बजट मदद करेगा.

राफेल फाइटर जेट: वायुसेना में 36 राफेल फाइटर जेट हैं और अब और खरीदने की योजना है. नौसेना के लिए भी 26 या उससे ज्यादा राफेल-एम के सौदे होने हैं. 

अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (UAV/ड्रोन): रूस- यूक्रेन युद्ध और पाकिस्तान के साथ झड़प में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया. इससे पता चलता है कि अब ड्रोन्स की अहमियत बढ़ी है, जिसके चलते सरकार भी ड्रोन्स के निर्माण पर ध्यान दे रही है. जैसे हाई एल्टीट्यूड ड्रोन MQ-9B, स्वदेशी ड्रोन और काउंटर ड्रोन सिस्टम जैसे प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं. इनके अलावा  LCA Mk1A/Mk2 तेजस फाइटर हेलिकॉप्टर, ब्रह्मोस मिसाइल, S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, नए रडार सिस्टम जैसे भी प्रोजेक्टस पाइपलाइन में हैं. 

इस बजट में क्या बदलाव हुआ?
कुल रक्षा बजट: 7.8 लाख करोड़ रुपये है. पिछले साल के मुकाबले यह करीब 14-15 प्रतिशत ज्यादा है. 2024-25 के मुकाबले से पिछले साल रक्षा बजट में 9.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई थी. 

कैपिटल बजट: इस बार आधुनिकीकरण के लिए 2.19 लाख करोड़ आवंटित किए गए, जबकि पिछले साल 1.80 लाख करोड़ आवंटित हुए थे.

फोकस: सरकार का फोकस घरेलू उत्पादन, स्वदेशी हथियार और निर्यात बढ़ाने पर है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ा है, उधर चीन के साथ भी सीमा पर चुनौतियां हैं. इसके चलते भारतीय सेना को आधुनिक बनाने की जरूरत है.

7,84,678 करोड़ रुपये में से 2,19,306 करोड़ रुपये कैपिटल बजट के लिए आवंटित हैं. कैपिटल बजट का मतलब है कि यह राशि हथियारों की नई खरीद, उपकरण और तकनीक पर खर्च की जाएगी. राजस्व व्यय (Revenue Expenditure) 5,53,668 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जिसमें पेंशन के लिए 1,71,338 करोड़ रुपये शामिल हैं.

बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने असैन्य, प्रशिक्षण और अन्य विमानों के निर्माण के लिए आवश्यक घटकों और पुर्जों पर मूल सीमा शुल्क से छूट देने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने डिफेंस सेक्टर की यूनिट्स की ओर से रखरखाव, मरम्मत या मॉर्डनाइजेशन के लिए उपयोग किए जाने वाले विमान के पुर्जों के निर्माण लिए आयातित कच्चे माल पर मूल सीमा शुल्क माफ करने की भी घोषणा की. इन दोनों फैसलों से रक्षा और अंतरिक्ष उद्योग को मदद मिलने की उम्मीद है.

 

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