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मनीष तिवारी ने ईरान के चाबहार पोर्ट में भारत की भागीदारी पर किया सवाल तो सरकार ने दिया ये जवाब
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मनीष तिवारी ने ईरान के चाबहार पोर्ट में भारत की भागीदारी पर किया सवाल तो सरकार ने दिया ये जवाब

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संसद के बजट सत्र के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने शुक्रवार (6 फरवरी, 2026) को लोकसभा में केंद्र सरकार से ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारत की भागीदारी को लेकर सवाल किया. मनीष तिवारी ने लोकसभा में विदेश मंत्री से पूछा कि क्या सरकार ने पुनः लागू या विस्तारित अमेरिकी प्रतिबंधों के जोखिम को देखते हुए ईरान में चाबहार बंदरगाह परियोजना में भारत की रणनीतिक, वित्तीय और परिचालन भागीदारी की समीक्षा की है? यदि हां, तो इसके विवरण क्या हैं?

कांग्रेस सांसद ने लोकसभा में पूछे कई सवाल

उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या भारतीय संस्थाओं, विशेषकर इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) को संभावित द्वितीयक प्रतिबंधों के जोखिम को कम करने के लिए कोई कदम उठाए गए हैं और यदि हां, तो इसके विवरण क्या हैं?

उन्होंने पूछा कि क्या चाबहार बंदरगाह परियोजना से संबंधित प्रबंधन या निर्णय‑निर्धारण भूमिकाओं से किसी भारतीय अधिकारी या प्रतिनिधि को वापस बुलाया गया है और अगर हां तो इसके कारण क्या हैं और अफगानिस्तान, मध्य एशिया और अंतरराष्ट्रीय उत्तर‑दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) तक पहुंच सहित भारत के दीर्घकालिक रणनीतिक और कनेक्टिविटी उद्देश्यों पर ऐसे उपायों का क्या प्रभाव पड़ेगा?

इसके अलावा, क्या सरकार चाबहार में भारत की निरंतर भागीदारी के लिए छूट या सुरक्षा उपायों की मांग करने के लिए अमेरिका और अन्य भागीदारों के साथ जुड़ी हुई है और अगर हां, तो ऐसे राजनयिक प्रयासों की वर्तमान स्थिति क्या है?

कांग्रेस सांसद के सवाल के जवाब में बोले विदेश राज्य मंत्री

लोकसभा में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी की ओर से पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि चाबहार बंदरगाह परियोजना को अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए और मध्य एशिया के साथ व्यापार और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था.

उन्होंने कहा कि एक भारतीय कंपनी, इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL), ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल चाबहार फ्री जोन (IPGCFZ) के माध्यम से 2018 में इस बंदरगाह का संचालन शुरू किया. उन्होंने कहा कि 13 मई, 2024 को IPGL ने ईरान के बंदरगाह और समुद्री संगठन के साथ चाबहार बंदरगाह के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के उपकरण और संचालन के लिए 10‑वर्षीय अनुबंध पर हस्ताक्षर किए. अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार, भारत ने बंदरगाह उपकरण की खरीद के लिए 1.2 अरब डॉलर का योगदान देने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा कर लिया है.

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आगे कहा कि 16 सितंबर 2025 को, अमेरिकी विदेश विभाग ने 2018 में ईरान फ्रीडम और काउंटर प्रोलिफरेशन एक्ट 2012 के तहत अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए जारी प्रतिबंध अपवाद को 29 सितंबर, 2025 से प्रभावी रूप से रद्द कर दिया.

उन्होंने कहा कि अमेरिकी पक्ष के साथ चर्चा के बाद, अमेरिकी सरकार ने 26 अप्रैल, 2026 तक शर्तों के साथ प्रतिबंध छूट को बढ़ाने का निर्देश जारी किया. भारत सरकार इन विकासों के प्रभावों को समझने और समाधान खोजने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ जुड़ी हुई है.

यह भी पढ़ेंः U-19 वर्ल्डकप: विश्व विजेता बना इंडिया, PM मोदी, अमित शाह, राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने दी बधाई



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