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‘जलाने से किताबें चंद, कभी इतिहास नहीं मरता…’, शशि थरूर ने नालंदा यूनिवर्सिटी पर लिखी कविता
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‘जलाने से किताबें चंद, कभी इतिहास नहीं मरता…’, शशि थरूर ने नालंदा यूनिवर्सिटी पर लिखी कविता

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कांग्रेस के सीनियर नेता और लोकसभा सांसद शशि थरूर हाल ही में नालंदा साहित्य महोत्सव में भाग लेने के लिए बिहार के दौरे पर थे. इस दौरान उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय, बिहार म्यूजियम समेत राज्य के कई ऐतिहासिक स्थलों का भी भ्रमण किया और उनकी सराहना भी की. नालंदा विश्वविद्यालय की यात्रा के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बुधवार (24 दिसंबर, 2025) को इसको लेकर एक कविता भी लिखी. अपनी कविता के जरिए थरूर ने नालंदा विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास को दर्शाया. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नालंदा यूनिवर्सिटी में आठवीं शताब्दी तक ज्ञान की धारा बहती थी.

शशि थरूर ने नालंदा पर लिखी कविता की साझा

शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बुधवार (24 दिसंबर, 2025) को एक पोस्ट में नालंदा पर लिखी कविता को शेयर किया. उन्होंने लिखा, ‘नालंदा! गज़ब इतिहास है अपना, गज़ब बीता ज़माना था, सारी दुनिया के लोगों का, यहां तब आना जाना था. कवि, शायर और दर्शन के, बड़े विद्वान आते थे, बौद्ध अनुयायी भी आकर यहां शांति सिखाते थे.’

उन्होंने आगे लिखा, ‘शतक कुछ आठ तक शायद, ज्ञान का दरिया बहता था, सारी दुनिया से आकर के यहां ज्ञानार्थी रहता है. हमें वो दौर गुजरा फिर, यहीं पर वापिस लाना है. हम गिर कर उठ भी सकते हैं, हमें सबको दिखाना है. जलाने से किताबें चंद, कभी इतिहास नहीं मरता. जो मरते होंगे, वो हैं आम हिंद! सा, खास नहीं मरता.’

नालंदा विश्वविद्यालय की तारीफ कर क्यों घिर गए थरूर?

हालांकि, कांग्रेस नेता शशि थरूर अपने बिहार यात्रा के दौरान नालंदा विश्वविद्यालय की तारीफ करने के बाद विवादों में घिर गए. दरअसल, कांग्रेस नेता ने अपनी बिहार यात्रा के दौरान कहा कि बिहार को लेकर उनकी जो पुरानी धारणाएं थीं, वे अब पूरी तरह बदल चुकी है. इसके अलावा, उन्होंने बिहार में हुई आधुनिक बुनियादी ढांचे और ऐतिहासिक विरासत की सराहना की. उनके इसी बयान के बाद राजनीतिक कयास और एनडीए सरकार की तारीफ करने की बात कही जाने लगी. जिसके बाद थरूर ने इसे लेकर सफाई भी दी.

उन्होंने कहा कि मैंने न तो भाजपा का जिक्र किया और न ही किसी सीएम या नेता का नाम लिया. मैंने नालंदा विश्वविद्यालय और दो म्यूजियम, जिनकी सैर की, उनकी तारीफ की. ऐसी आम बातों पर राजनीतिक विवाद क्यों खड़ा करना चाहिए, जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है?

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