असम में चुनावी माहौल गरमाता जा रहा है और नेताओं के बयान अब सीधे राजनीतिक टकराव में बदलते दिख रहे हैं. कछार में जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री और भाजपा उम्मीदवार हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस और विपक्षी नेताओं पर तीखा हमला बोला. उन्होंने शुक्रवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को लेकर कटाक्ष किया. इसके अलावा सरमा का यह बयान सिर्फ कांग्रेस तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी पर भी निशाना साधते हुए कहा, ‘असदुद्दीन ओवैसी जो भी नारा दे. चुनाव के बाद तो नारा प्रधानमंत्री मोदी और मेरा ही चलेगा.’
इस बयान के जरिए सरमा ने साफ संकेत दिया कि भाजपा को अपनी जीत का भरोसा है. विपक्ष का प्रभाव सीमित है.
असम में इस बार चुनाव विकास-स्थानीय मुद्दों तक सीमित
असम में इस बार चुनाव सिर्फ विकास या स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पहचान, जमीन और राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई में बदलता नजर आ रहा है. खासकर प्रवासन, अतिक्रमण और भूमि से जुड़े मुद्दों ने चुनावी बहस को और धार दे दी है. ऐसे में नेताओं के बयान भी अधिक आक्रामक और सीधे हो गए हैं.
ओवैसी ने किया पलटवार?
इसी बीच बारपेटा में एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने सरमा के बयान और राज्य सरकार की नीतियों पर कड़ा पलटवार किया. उन्होंने कहा, ‘हिमंत बिस्वा सरमा जो कर रहे हैं, वह असंवैधानिक है, और बदरुद्दीन अजमल की पार्टी सुप्रीम कोर्ट गई थी और वहां से आदेश भी लेकर आई. अगर वन भूमि है, तो वैकल्पिक जमीन दी जाए.’ ओवैसी ने आरोप लगाया कि सरकार एक विशेष समुदाय को निशाना बना रही है.
ओवैसी यहीं नहीं रुके. उन्होंने सरकार की कार्रवाई को ‘गैरकानूनी, असंवैधानिक और दमनकारी’ बताते हुए कहा,’सिर्फ एक समुदाय के खिलाफ टारगेटेड एक्शन लिया जा रहा है और हम इसकी निंदा करते हैं.’
उन्होंने यह भी दावा किया कि जनता इस बार सरकार को जवाब देगी. उन्होंने कहा कि हमें भरोसा है कि 9 तारीख को बड़ी संख्या में लोग एआईयूडीएफ के पक्ष में वोट करेंगे. ओवैसी ने मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर भी निशाना साधा और कहा कि मुख्यमंत्री एक अमीर आदमी की तरह बात कर रहे हैं. वे गरीब विरोधी हैं. AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि जब असम में 50 हजार मुस्लिम अल्पसंख्यकों को बेघर कर दिया जा रहा था तब अगर कोई लड़ रहा था तो वो AIUDF का नेतृत्व था. कांग्रेस अंधी और गूंगी बन चुकी थी.
राहुल-प्रियंका को पता है वह हारने वाले हैं: हिमंता बिस्वा सरमा
उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व की सक्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल गांधी केरलम चला गया. दोनों (राहुल गांधी और प्रियंका गांधी) एक बार आए थे. दोनों 2-2 बैठक करके चले गए. उन्हें भी पता है कि वे हारने वाले हैं.
इस बार असम के चुनाव में दिख रही तीखी बयानबाजी
असम की राजनीति में यह टकराव नया नहीं है, लेकिन इस बार बयानबाज़ी का स्तर और तीखापन ज्यादा दिखाई दे रहा है. एक ओर भाजपा अपनी जीत को लेकर आत्मविश्वास से भरी नजर आ रही है, वहीं विपक्ष सरकार की नीतियों को मुद्दा बनाकर माहौल बनाने में जुटा है. अब सबकी नजर 9 तारीख पर टिकी है, जब वोटिंग के जरिए जनता यह तय करेगी कि किसके दावों में कितना दम है. चुनावी मैदान में शब्दों की यह जंग आखिरकार वोटों की ताकत से ही तय होगी.
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