झारखंड के चतरा जिले में 23 फरवरी, 2026 को हुए एयर एंबुलेंस हादसे को लेकर एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आई है. इस हादसे में कुल सात लोगों की मौत हुई थी.
यह विमान 41 साल के बर्न पेशेंट संजय कुमार को रांची से दिल्ली एयरलिफ्ट कर रहा था. संजय कुमार लातेहार जिले के चंदवा के रहने वाले थे, जिन्हें 65 फीसदी जलने के बाद रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती कराया गया था. विमान में दो पायलट, एक डॉक्टर, एक पैरामेडिक और दो अटेंडेंट समेत कुल सात लोग सवार थे और प्लेन क्रैश में सभी की मौत हो गई.
टेकऑफ के वक्त ही खराब था मौसम
AAIB रिपोर्ट के मुताबिक, रांची एयरपोर्ट पर दोपहर बाद से ही खतरनाक कमुलोनिंबस बादल दिखने लगे थे. शाम होते-होते थंडरस्टॉर्म की स्थिति बन गई थी. पायलट ने टेकऑफ से पहले ही मौसम का हवाला देकर ATC से रूट बदलने की अनुमति मांगी, जो मिल गई. विमान ने शाम करीब 7:07 बजे अपनी उड़ान भरी.
रिपोर्ट के अनुसार, उड़ान भरने के बाद विमान ने कोलकाता ATC से संपर्क किया और FL140 पर लेवल ऑफ की अनुमति मांगी. शाम 7:34 बजे विमान ने मौसम की वजह से रूट डेविएशन मांगा और उसके बाद कोलकाता ATC से रेडियो और रडार संपर्क पूरी तरह टूट गया. करीब 7:54 बजे UTC पर चतरा के कासियातू जंगल में विमान क्रैश हो गया.
विमान से फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर लापता
रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि विमान में फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर दोनों नहीं थे. इससे हादसे की सटीक वजह जानना जांचकर्ताओं के लिए मुश्किल हो गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों इंजन पंख से अलग होकर 250 से 640 मीटर दूर जा गिरे. पूंछ का हिस्सा धड़ से अलग होकर टुकड़ों में बिखर गया. इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर भी एक्टिवेट नहीं हुआ.
AAIB ने रांची के रिफ्यूलर का फ्यूल सैंपल जांच के लिए भेजा है. रांची और कोलकाता ATC के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं. ICAO और अमेरिकी जांच एजेंसी NTSB को भी सूचित किया गया है. हादसे की असल वजह अभी जांच के दायरे में है.
यह भी पढ़ेंः हैदराबाद में अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई, मुर्गी चौक, पथरगट्टी और मदीना में चला विशेष अभियान


