DS NEWS | The News Times India | Breaking News
’80 दिन कैद में और 28 दिन मौत के साये में’, जब मासूम बेटी के सवाल पर फूट-फूटकर रो पड़े कैप्टन वि
India

’80 दिन कैद में और 28 दिन मौत के साये में’, जब मासूम बेटी के सवाल पर फूट-फूटकर रो पड़े कैप्टन वि

Advertisements


‘वो 80 दिन… ज़िंदगी का एक-एक मिनट घंटों की तरह बीत रहा था. हर धड़कन के साथ बस एक ही ख्याल आता था कि क्या कभी अपने परिवार का चेहरा दोबारा देख पाएंगे?’ यह शब्द उन भारतीय नाविकों के हैं जो पहले एक साजिश के तहत विदेशी जेल में ठूंसे गए और फिर ईरान-इजरायल युद्ध की विभीषिका के बीच मौत को मात देकर वतन लौटे हैं. MT वैलिएंट रोर (MT Valiant Roar) के कैप्टन विजय कुमार जब अपनी आपबीती सुनाते हैं, तो उनकी आंखें भर आती हैं और गला रुंध जाता है. यह कहानी सिर्फ एक रेस्क्यू की नहीं, बल्कि एक पिता के सम्मान और मौत के जबड़े से निकलकर आने की है.

कैप्टन विजय ने क्या जानकारी दी? 

  • कैप्टन विजय ने रुंधे गले से बताया कि कैद के दौरान सबसे दर्दनाक पल वह नहीं था जब उन्हें जेल में रखा गया, बल्कि वह था जब उनकी मासूम बेटी ने इंटरनेट पर अपने पिता के जहाज पर ‘डीजल तस्करी’ (Smuggling) के आरोपों की खबर पढ़ी. मासूमियत और डर से कांपती आवाज में बेटी ने फोन पर पूछा- ‘पापा, क्या सच है जो पढ़ा? मेरी कसम खाकर बताइए!
  • कैप्टन कहते हैं, ‘उस वक्त मेरा कलेजा मुंह को आ गया. मैं कैमरे के सामने फूट-फूटकर रोने लगा. मैंने अपनी बेटी को विश्वास रखना मुझपर. एक ईमानदार नाविक और पिता के लिए इससे बड़ी सजा और क्या होगी कि उसकी अपनी संतान उसकी सच्चाई पर सवाल खड़ा देखे.’
  • 8 दिसंबर 2025 को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इनके जहाज पर फायरिंग की गई और इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. लेकिन असली नर्क तब शुरू हुआ जब 28 फरवरी को युद्ध छिड़ गया. कैप्टन ने बताया,’हम बंदर अब्बास में थे. नजारा बिल्कुल फिल्म ‘पर्ल हार्बर’ जैसा था. हमारे सिर के ऊपर से मिसाइलें गुजर रही थीं. जब ईरानी नेवी के हमले होते और मिसाइलें आसपास के जहाजों से टकरातीं, तो समुद्र की लहरों के कंपन से हमारा पूरा शिप थरथराने लगता था. हम कई रातों तक सो नहीं पाए, बस जान बचाने के लिए शिप पर इधर-बदल भागते रहे.
  • जब जहाज पर रहना नामुमकिन हो गया, तो भारतीय दूतावास की मदद से उन्हें होटल शिफ्ट किया गया, लेकिन वहां भी मौत पीछा नहीं छोड़ रही थी. होटल के एक तरफ नेवल बेस था और दूसरी तरफ एयर बेस. धमाकों की गूंज के बीच वे पूरी रात खुले आसमान के नीचे खड़े रहते थे. वतन वापसी का इकलौता रास्ता आर्मेनिया सीमा था, जो 1800 किलोमीटर दूर था.
  • कैप्टन ने बताया कि, ईरानी अधिकारियों ने हमारा सब कुछ छीन लिया था. एक टैक्सी ड्राइवर 3000 डॉलर में ले जाने को तैयार हुआ. 22 मार्च को हम निकले, दो ड्राइवर बिना रुके गाड़ी चलाते रहे और रास्ते भर बम गिर रहे थे.’

जेल में बस घर वालों की याद आती और हम रोते थे

जहाज के ऑयलर मसूद आलम बताते हैं कि जेल के उन अंधेरे कमरों में जब भी घर बात होती, तो सिर्फ सिसकियां सुनाई देती थीं. ‘मेरे परिवार को भरोसा था कि मैं बेगुनाह हूं, बस इसी भरोसे ने मुझे जिंदा रखा. थर्ड ऑफिसर वेंकट राव और फिटर वेंकटेश की आंखों में भी वह खौफ आज साफ देखा जा सकता है.

आज जब ये नाविक अपनी मिट्टी पर वापस आए हैं, तो उन्होंने रुंधे गले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय दूतावास का शुक्रिया अदा किया. FSUI के जनरल सेक्रेटरी मनोज यादव ने बताया कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. कई भारतीय अब भी वहां फंसे हैं, जिन्हें मदद की दरकार है.

80 दिन की अवैध कैद और 28 दिन युद्ध के साये में बिताने के बाद, ये जांबाज आज भारत पहुंचे हैं. इनके लिए यह सिर्फ घर वापसी नहीं, बल्कि एक नया जन्म है.

तारीख-दर-तारीख: मौत के साये में बीते उन 108 दिनों का कच्चा चिट्ठा

(यह टाइमलाइन बताती है कि कैसे 8 दिसंबर से शुरू हुआ यह खौफनाक सफर 29 मार्च को भारत की सरजमीं पर आकर खत्म हुआ.)

  • 8 दिसंबर 2025: अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र (International Waters) में ‘MT वैलिएंट रोर’ जहाज पर ईरानी नेवी ने अचानक फायरिंग की और पूरे क्रू को हिरासत में ले लिया. उन पर डीजल तस्करी का झूठा आरोप लगाया गया.
  • 6 जनवरी 2026: क्रू के सदस्यों को दो हिस्सों में बांट दिया गया. 10 लोगों को ईरान की जेल में डाल दिया गया, जबकि 8 सदस्यों को जहाज (Ship) पर ही कैद रखा गया.
  • 2 फरवरी 2026: पहली राहत मिली. जेल से 5 सदस्यों को और जहाज से 3 सदस्यों को रिहा किया गया.
  •  26 फरवरी 2026: जेल में बंद बाकी 5 सदस्यों को भी रिहा किया गया और उन्हें बंदर अब्बास पोर्ट के पास एक होटल में रखा गया.
  • 28 फरवरी 2026: युद्ध की शुरुआत. रिहाई के अगले ही दिन युद्ध छिड़ गया और ये नाविक बंदर अब्बास में मिसाइलों और बमबारी के बीच फंस गए.
  • 3 मार्च 2026: जहाज पर फंसे बाकी 5 सदस्यों को भी निकालकर उसी होटल में लाया गया. अब पूरा क्रू एक साथ था, लेकिन चारों तरफ धमाके हो रहे थे.
  • 22 मार्च 2026: भारतीय दूतावास की मदद और टैक्सी का इंतजाम कर ये नाविक 1800 किलोमीटर दूर आर्मेनिया बॉर्डर के लिए निकले. रास्ते भर बमबारी का खतरा बना रहा.
  • 24 मार्च 2026: खतरे से खेलते हुए ये अज़रबैजान के ‘जुल्फा’ शहर पहुंचे. यहाँ भारतीय दूतावास ने उनके रुकने के लिए होटल बुक किया था.
  • 26 मार्च 2026: दोपहर 12 बजे जुल्फा के होटल से आर्मेनिया बॉर्डर के लिए आखिरी सफर शुरू हुआ. महज 2 घंटे में बॉर्डर पहुंचे, लेकिन कागजी कार्रवाई में दोपहर 2 बजे से रात 11 बजे तक का समय लग गया.
  • 27 मार्च 2026: बॉर्डर पार कर आर्मेनिया एयरपोर्ट तक पहुँचने में 10 घंटे का सफर तय किया. कुछ नाविकों की उसी दिन की फ्लाइट थी, जबकि कुछ हॉस्टल में रुके.
  • 28 मार्च 2026: बचे हुए नाविकों ने आर्मेनिया से भारत के लिए उड़ान भरी.
  • 29 मार्च 2026: आखिरकार 108 दिनों के लंबे और खौफनाक संघर्ष के बाद ये सुरक्षित भारत पहुंचे.

यह भी पढ़ें: ईरान के हमले से दो टुकड़ों में बंट गया अमेरिका का AWACS, सामने आई सऊदी एयरबेस से पहली तस्वीर



Source link

Related posts

‘मुझे UPA में मंत्री बना दिया होता तो इधर नहीं आता…’ फिर दिखा रामदास अठावले का मजाकिया अंदाज

DS NEWS

राज्यसभा में बदलेगा नंबर गेम, 2026 में 75 सीटों पर होगा चुनाव, यूपी से 10 सीटें होंगी खाली

DS NEWS

‘पूरा PoK भारत का है’, शक्सगाम घाटी पर चीन के दावे को लद्दाख LG कविंदर गुप्ता ने किया खारिज

DS NEWS

Leave a Comment

DS NEWS
The News Times India

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy