बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विरोध के बीच कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के नेता आज यानि सोमवार (11 अगस्त, 2025) को चुनाव आयोग के दफ्तर में चुनाव आयुक्त से चर्चा करेंगे. इस बीच चुनाव आयोग ने कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश को चिट्ठी लिखी है और कांग्रेस नेताओं को मीटिंग के लिए दोपहर 12 बजे बुलाया है.
चुनाव आयोग की तरफ से पत्र जारी कर चर्चा के लिए बुलाया गया है. इसमें 30 नेताओं को ही आने की इजाजत दी गई है. बता दें कि SIR मुद्दे पर आज पार्लियामेंट परिसर से चुनाव आयोग के ऑफिस तक विपक्ष की तरफ से एक मार्च निकाला जाएगा. ये विरोध मार्च दोपहर 11.30 बजे शुरू होना है.
चुनाव आयोग ने अपने पत्र में क्या लिखा?
निर्वाचन आयोग की तरफ से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि आपके दिनांक 10.08.2025 के पत्र का संदर्भ देने और यह बताने का निर्देश हुआ है कि आयोग ने उसमें किए गए अनुरोध पर विचार किया है और दोपहर 12:00 बजे बातचीत के लिए समय देने का निर्णय लिया है. पत्र में आगे कहा गया है कि जगह की कमी के कारण कृपया वाहन संख्या सहित अधिकतम 30 व्यक्तियों के नाम election@eci.gov.in पर ई-मेल कर सूचित करें.
चुनाव आयोग की चिट्ठी पर क्या बोली कांग्रेस?
वहीं चुनाव आयोग के आमंत्रण पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि चुनाव आयोग की चोरी पकड़ी गई, इसलिए घबराहट में हमें आमंत्रण दिया है. आयोग को जगाने के लिये हम लोग जा रहे हैं. साथ ही कहा कि चुनाव आयोग पीएम के देखरेख में काम कर रहा है.
Election Commission of India Secretariat writes to Congress MP Jairam Ramesh
“EC has granted an appointment for an interaction at 12:00 PM today. It is requested that, due to the limitation of space, names of up to 30 persons may kindly be intimated…”, reads the letter
As of… pic.twitter.com/PZLXei4wfH
— ANI (@ANI) August 11, 2025
राहुल गांधी की डिजिटल मतदाता सूची सार्वजनिक करने की मांग
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के खिलाफ अलग मोर्चा खोल रखा है. नेता विपक्ष ने रविवार (10 अगस्त, 2025) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वोट चोरी ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के बुनियादी लोकतांत्रिक सिद्धांत पर हमला है. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए साफ़-सुथरी मतदाता सूची अनिवार्य है. राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग से हमारी मांग है कि पारदर्शिता दिखाएं और डिजिटल मतदाता सूची सार्वजनिक करें, ताकि जनता और राजनीतिक दल उसका खुद ऑडिट कर सकें.
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