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ओडिशा में बंगाल के प्रवासी मजदूरों को ‘बांग्लादेशी’ समझ भीड़ ने पीटा, पीड़ित बोला- ‘जय श्री राम
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ओडिशा में बंगाल के प्रवासी मजदूरों को ‘बांग्लादेशी’ समझ भीड़ ने पीटा, पीड़ित बोला- ‘जय श्री राम

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भुवनेश्वर के महादेवनगर में सोमवार (25 अगस्त, 2025) को ‘बांग्लादेशी मवेशी चोर’ होने के संदेह में मुर्शिदाबाद के 8 प्रवासी मजदूरों पर भीड़ ने हमला बोल दिया. 8 मजदूरों में से, 36 वर्षीय अब्दुल अलीम, जिसकी पसली और पैर को फ्रैक्चर कर दिया गया, बुधवार (27 अगस्त, 2025) को अपने घर भागबंगोला के काशीपुर गांव पहुंच गया.

अब्दुल ने बताया कि बाकी मजदूरों को भुवेश्वर एम्स में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है. बंगाल पुलिस का कहना है कि वह और अधिक जानकारी के लिए ओडिशा पुलिस से संपर्क कर रही है. खबरों के अनुसार, ओडिशा पुलिस ने भीड़ को शांत कराने के लिए कोई कदम नहीं उठाया.

बोतलों, डंडों और लकड़ियों से की पिटाई

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अब्दुल अलीम को शनिवार के दिन मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल से छुट्टी मिली. उन्होंने बताया, ‘मैं रविवार को निर्माण कार्य के लिए भुवनेश्वर गया था. ट्रेन लेट थी और हम रात करीब 11 बजे अपने कैंप पहुंचे. जैसे ही मुझे नींद आई, लगभग 15-20 आदमी कैंप में घुस आए और चिल्लाने लगे कि यहां बांग्लादेशी कौन हैं?’

अब्दुल ने आगे बताया कि उन्होंने हमें बोतलों, डंडों और लकड़ियों से पीटना शुरू कर दिया. कैंप में 8 बंगाली और 15 उड़िया मजदूर थे. बंगाली मजदूरों में से तीन फरक्का, तीन लालगोला और एक रानीतला से थे, सभी मुर्शिदाबाद में रहते हैं.

जंगल के रास्ते अब्दुल भागने में कामयाब

उन्होंने बताया कि ‘जय श्री राम’ का नारा लगाकर जब 5 लोग मुझे पीट रहे थे, तब 2 हमलावर मेरे ऊपर खड़े थे. उन्होंने मेरा आधार कार्ड, पैन कार्ड, बटुआ और फोन छीन लिया. मेरी लुंगी और बनियान खून से लथपथ हो गई थी, मैं किसी तरह जंगल के रास्ते भाग निकला.

अलीम ने आगे बताया कि खुशकिस्मती से एक ऑटोचालक ने मुझे देख लिया. मैंने उसके फोन से अपने भाई को फोन किया और ऑटो ड्राइवर मुझे अस्पताल ले गया. अलीम ने बताया कि उसके ठेकेदार रबीउल इस्लाम और उसके बहनोई जुलमत अली ने उसे भर्ती कराया और उसे कोलकाता जाने वाली बस में चढ़ाने में मदद की.

पुलिस ने सादे कागज पर कराए दस्तखत

अलीम ने कहा कि मैं 2013 से बंगाल के बाहर अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा हूं, लेकिन कभी ऐसी नौबत नहीं आई. बाकी लोगों की हालत मुझसे भी बदतर है. मैंने सुना है कि पुलिस ने उनसे सादे कागज पर दस्तखत करवाए.

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