सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल SIR से जुड़े दावों और आपत्तियों के निपटारे में लगे न्यायिक अधिकारियों की संख्या बढ़ाने को कहा है. यह आदेश पूरी प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस झारखंड और उड़ीसा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से भी न्यायिक अधिकारी उपलब्ध करवाने का अनुरोध कर सकते हैं.
20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश राज्य सरकार और चुनाव आयोग की तरफ से एक-दूसरे के ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को देखते हुए SIR के काम में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का आदेश दिया था. तब कोर्ट ने कहा था कि वह अब मार्च में इस मामले को सुनेगा, लेकिन कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की तरफ से दाखिल रिपोर्ट के चलते मंगलवार, 24 फरवरी को यह सुनवाई की गई.
रिपोर्ट को पढ़ते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि इस समय 250 जिला जज और अतिरिक्त जिला जज स्तर के अधिकारी लगभग 50 लाख दावों की जांच कर रहे हैं. अगर हर अधिकारी रोज 250 मामलों का निपटारा भी करे, तो पूरी प्रक्रिया पूरी होने में लगभग 80 दिन लग सकते हैं. इस बात पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की संख्या बढ़ाने को कहा.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस कम से कम तीन साल के अनुभव वाले सिविल जजों की ड्यूटी भी SIR के काम के लिए लगा सकते हैं. इसके अलावा जरूरत पड़ने पर ओडिशा और झारखंड के चीफ जस्टिस से भी सेवारत या रिटायर्ड न्यायिक अधिकारियों की मांग की जा सकती है. इन अधिकारियों की यात्रा, रहने और खाने का खर्च चुनाव आयोग उठाएगा.
आदेश में यह भी कहा गया है कि 14 फरवरी तक जिन लोगों ने पर्याप्त सबूतों के साथ माध्यमिक बोर्ड सर्टिफिकेट या आधार कार्ड जमा करवाया है, दावों के निपटारे के समय उस पर भी विचार किया जाएगा. कोर्ट ने कहा है कि तय कार्यक्रम के मुताबिक फाइनल लिस्ट के प्रकाशन की तारीख 28 फरवरी है. चुनाव आयोग उस दिन लिस्ट का प्रकाशन करे, लेकिन दावों की बड़ी संख्या को देखते हुए वह इस तारीख के बाद भी सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी कर सकता है. सप्लीमेंट्री लिस्ट में जगह पाने वाले लोगों को भी फाइनल लिस्ट में शामिल माना जाएगा.


