DS NEWS | The News Times India | Breaking News
‘सेंट्रल फोर्स तैनात करो…’, बंगाल में SIR का काम कर रहे जजों पर हमले से सुप्रीम कोर्ट नाराज
India

‘सेंट्रल फोर्स तैनात करो…’, बंगाल में SIR का काम कर रहे जजों पर हमले से सुप्रीम कोर्ट नाराज

Advertisements


पश्चिम बंगाल के मालदा में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के काम में लगे न्यायिक अधिकारियों पर पथराव और लाठियों से हमले की घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है. कोर्ट ने चुनाव आयोग को सख्त आदेश दिया है कि वह न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों को तैनात करे. सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर के दौरान बंगाल की वोटर लिस्ट से बाहर किए गए करीब 50 लाख लोगों की आपत्तियों और दावों की जांच के काम में जिला और सेशन जजों को लगाया है. बुधवार (1 अप्रैल, 2026) को यहां प्रदर्शनकारियों ने उन पर हमला कर दिया. कोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लिया है और घटना पर नाराजगी जताई है.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचौली की बेंच ने मामले पर संज्ञान लिया है. कल दोपहर से रात तक प्रदर्शनकारियों ने न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना कर रखा और जब रात को वह निकल कर जाने लगे तो उनके वाहनों पर पत्थर और लाठियों से हमला किया गया. कोर्ट ने इस घटना पर गंभीर संज्ञान लिया है.

कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया है कि जहां भी ये अधिकारी रुके हैं, वहां भी सुरक्षा दी जाए. अगर जरूरी हो तो परिवार के सदस्यों को भी सुरक्षा दी जाए. चुनाव आयोग जरूरत के मुताबिक कदम उठाए और राज्य सरकार आयोग के निर्देशों के मुताबिक काम करे. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में यह भी कहा है कि जहां दावों का निपटारा हो रहा है, वहां एक बार में 5 से ज्यादा लोगों को जमा न होने दिया जाए. बेंच ने मुख्य सचिव, डीजीपी, डीएम और एसपी को कारण बताओ नोटिस कर कहा है कि वह बताएं कि उनके विरुद्ध कार्रवाई क्यों न हो.

कोर्ट ने इन अधिकारियों को यह भी आदेश दिया है कि वह 6 अप्रैल को ऑनलाइन सुनवाई में मौजूद रहें. कोर्ट ने चुनाव आयोग को घटना की जांच निष्पक्ष एजेंसी से करवाने को कहा है. यह एजेंसी CBI या NIA हो सकती है. जांच करने वाली एजेंसी को अपनी रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपने का भी आदेश दिया गया है. 

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल को फटकार लगाई है और कहा है, ‘दुर्भाग्य से आपके राज्य में हर अधिकारी राजनीतिक भाषा बोलता है. क्या आप समझते हैं कि हम नहीं जानते कि उपद्रवी कौन थे? मैं रात 2 बजे तक स्थिति की जानकारी ले रहा था.’

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि वहां मालदा के डीएम और एसपी नहीं पहुंचे. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने डीजीपी से संपर्क किया, उसके बाद देर रात न्यायिक अधिकारी बाहर निकल पाए.  इसके बाद भी उन पर पथराव हुआ. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ न्यायिक अधिकारियों को परेशान करने का मामला नहीं है. यह सुप्रीम कोर्ट के अधिकार को चुनौती देने जैसा है. सीजेआई ने कहा कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने बताया है कि चीफ सेक्रेट्री का नंबर व्हाट्सऐप पर उपलब्ध नहीं था. जिस तरह की घटना हुई है, उसका न्यायिक अधिकारियों के मनोबल पर असर पड़ सकता है. TMC के वकीलों ने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा जाए.

एसआईआर को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोके कपिल सिब्बल भी कोर्ट में मौजूद थे. सीजेआई से कपिल सिब्बल ने कहा कि कृपया यह टिप्पणी हटा लीजिए कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है. जस्टिस बागची ने इस पर कहा, ‘हम आपके अनुरोध पर विचार करेंगे, लेकिन इस बात को समझिए कि यह टिप्पणी आपके लिए चुनौती है. इसे गलत साबित करके दिखाइए.’

 

यह भी पढ़ें:-
बंगाल SIR को लेकर टीएमसी की आपत्तियों पर सुप्रीम कोर्ट को आया गुस्सा, बोले- अरे चुनाव आयोग ही बताएगा कि कैसे….



Source link

Related posts

बेंगलुरु में मगडी रोड इलाके में पति ने की पत्नी की गोली मारकर हत्या, आरोपी ने किया आत्मसमर्पण

DS NEWS

वायु प्रदूषण को लेकर भारत की वैश्विक रैंकिंग क्या? CPM सांसद ने पूछा सवाल, सरकार ने क्या दिया ज

DS NEWS

कैशकांड में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

DS NEWS

Leave a Comment

DS NEWS
The News Times India

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy