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‘बैंगन’ बोलने पर ट्रोल हुए केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया, TMC ने मजाक उड़ाते हुए कही बड़ी बात
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‘बैंगन’ बोलने पर ट्रोल हुए केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया, TMC ने मजाक उड़ाते हुए कही बड़ी बात

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केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने इंडियन सुपर लीग (ISL) के बारे में बात करते हुए कोलकाता के मशहूर फुटबॉल क्लब मोहन बागान का नाम गलत बोल दिया. उन्होंने ‘मोहन बागान’ की जगह ‘मोहन बैंगन’ जैसा उच्चारण किया, जो हिंदी में बैंगन जैसा सुनाई दिया. इसी तरह उन्होंने ईस्ट बंगाल को भी ‘ईस्ट बैंगन’ कहा. इस गलती का वीडियो वायरल हो गया और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसका जमकर मजाक उड़ाया.

ISL की प्रेस कॉन्फ्रेंस में गलत बोल दिए मंडाविया

6 जनवरी 2026 की रात को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मनसुख मंडाविया ने कहा, ‘हमने फैसला किया है कि ISL 14 फरवरी से शुरू होगी और हमारे सभी क्लब इसमें हिस्सा लेंगे. देश में फुटबॉल आगे बढ़ रहा है. लीग से अच्छे खिलाड़ी मिलते हैं. इसी उद्देश्य से ISL का आयोजन किया जाएगा.’

लेकिन मोहन बागान और ईस्ट बंगाल जैसे बड़े क्लबों का नाम बोलते समय मंत्री जी कई बार रुके, मदद मांगी और फिर भी ‘मोहन बैंगन’ और ‘ईस्ट बैंगन’ जैसा बोला. यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया.

TMC ने मंडाविया पर तंज कसते हुए मजाक उड़ाया

TMC ने बुधवार को X पर पोस्ट करके मंत्री पर निशाना साधा. उन्होंने लिखा, ‘केंद्रीय खेल मंत्री ने एक बार फिर BJP की बंगाल विरोधी सोच दिखा दी. उन्होंने हमारे सबसे सम्मानित फुटबॉल क्लबों के नाम बिगाड़ दिए- मोहन बागान को ‘मोहन बैंगन’ और ईस्ट बंगाल को ‘ईस्ट बैंगन’ कह दिया.’

TMC ने आगे लिखा, ‘बंगालियों के लिए मोहन बागान और ईस्ट बंगाल पहचान और गर्व के प्रतीक हैं. हम 100 साल से ज्यादा समय से इस खेल को जीते-मरते हैं. जीत पर उत्सव मनाते हैं, हार पर दुखी होते हैं. लेकिन BJP वाले बंगाल को सिर्फ ‘बंगला-विरोधी’ नजरिए से देखते हैं. वे इन पवित्र नामों को सही से बोल भी नहीं सकते. उनके लिए बंगाल से जुड़ी हर चीज सिर्फ मजाक और अनदेखी है.’

पोस्ट में ‘It’s not baigan’ (यह बैंगन नहीं है) लिखकर मजाक उड़ाया गया. TMC ने इसे BJP की ‘बंगाल विरोधी अहंकार’ से जोड़ा.

मोहन बागान और ईस्ट बंगाल की अहमियत क्या है?

ये दोनों क्लब कोलकाता के हैं और भारत के सबसे पुराने फुटबॉल क्लबों में से हैं. मोहन बागान की स्थापना 1889 में हुई थी. इसने 1911 में ब्रिटिश टीम को हराकर इतिहास रचा था. वहीं, ईस्ट बंगाल 1920 में शुरू हुआ. दोनों क्लब बंगाल की संस्कृति, गर्व और पहचान का हिस्सा है. फुटबॉल फैंस के लिए ये सिर्फ टीम नहीं, भावनाएं हैं.

सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हुए मंडाविया

मंडाविया की वीडियो वायरल होने के बाद फुटबॉल फैंस और TMC समर्थकों ने जमकर ट्रोल किया. कांग्रेस ने भी मजाक उड़ाया. हालांकि, मंत्री या खेल मंत्रालय की ओर से अभी कोई जवाब नहीं आया है. यह घटना पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल में BJP-TMC के बीच नए विवाद का कारण बन गई है. यह मामला दिखाता है कि बंगाल में फुटबॉल कितना संवेदनशील मुद्दा है.





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