DS NEWS | The News Times India | Breaking News
अमेरिका का मादुरो पर एक्शन, दुनियाभर में टेंशन, लेकिन भारत को हो सकता है अरबों का फायदा!
India

अमेरिका का मादुरो पर एक्शन, दुनियाभर में टेंशन, लेकिन भारत को हो सकता है अरबों का फायदा!

Advertisements


वेनेजुएला पर अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है और अब वहां का शासन अमेरिका के हाथों में आ गया है. ट्रंप ने क्लयीर कर दिया है कि जब तक वहां स्थिरता नहीं आती, अमेरिका ही काराकास को चलाएगा. अमेरिका के वेनेजुएला पर एक्शन से दुनियाभर में टेंशन का माहौल बन गया है, लेकिन इस एक्शन से भारत को फायदा पहुंच सकता है. 

वेनेजुएला के तेल भंडारण क्षेत्र पर अमेरिका के कंट्रोल और उसके पुनर्गठन का भारत को सीधा लाभ मिल सकता है. ऐसा हम नहीं, बल्कि एक्सपर्ट्स और उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है. एक्सपर्ट्स ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम से भारत के बकाए लगभग एक अरब डॉलर की वसूली हो सकती है. साथ ही भारतीय संस्थाओं की तरफ से संचालित तेल क्षेत्रों से कच्चे तेल का प्रोडक्शन बढ़ सकता है. 

वेनेजुएला से कच्चे तेल का प्रमुख आयातक देश था भारत 

भारत एक समय वेनेजुएला के कच्चे तेल का प्रमुख इंपोर्टर था. वह वेनेजुएला से चार लाख बैरल से अधिक के कच्चे तेल का आयात करता था. हालांकि, 2020 में अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते इस प्रक्रिया में बाधा आई थी. 

भारत की प्रमुख तेल कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड पूरी वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल तेल इलाके का संयुक्त संचालन करती है. अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से आवश्यक तकनीक, उपकरण और सेवाओं तक पहुंच बाधित हुई थी. इससे प्रोडक्शन पर असर पड़ा था. 

भारत को नहीं मिला अभी तक उसके हिस्से का पेमेंट 

वेनेजुएला सरकार ने इस प्रोजेक्ट में ओवीएल की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी पर 2014 तक देय 53.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर का लाभांश अभी तक नहीं चुकाया है. इसके बाद की अवधि के लिए भी लगभग समान राशि बकाया है, किंतु ऑडिट की अनुमति न मिलने के कारण इन दावों का निपटान लंबित है.

एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि अमेरिका वहां के तेल भंडार को अपनी निगरानी में लेता है, तो प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है. इसके बाद ओवीएल गुजरात और अन्य क्षेत्रों से रिग एवं अन्य उपकरण भेजकर उत्पादन में वृद्धि कर सकती है. इस समय यह उत्पादन घटकर मात्र 5,000 से 10,000 बैरल प्रतिदिन रह गया है.

एक्सपर्ट्स ने बताया, ऐसे बढ़ सकता है तेल का उत्पादन

अधिकारियों का अनुमान है कि अगर उन्नत उपकरण और अतिरिक्त तेल कुओं का उपयोग किया जाए तो उत्पादन बढ़कर 80,000 से 1,00,000 बैरल प्रतिदिन हो सकता है. इसके लिए आवश्यक रिग ओएनजीसी के पास पहले से उपलब्ध हैं. अमेरिकी नियंत्रण का अर्थ यह भी है कि वैश्विक बाजार में वेनेजुएला से निर्यात शीघ्र बहाल हो सकता है, जिससे ओवीएल को अपने पुराने बकाये की वसूली में सहायता मिलेगी. ओवीएल ने पूर्व में अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) से विशेष लाइसेंस के तहत प्रतिबंधों में छूट की मांग की थी. 

केप्लर के सीनियर रिसर्च एक्सपर्ट निखिल दुबे ने कहा कि प्रतिबंधों में ढील से व्यापार प्रवाह तेजी से बहाल हो सकता है और वेनेजुएला का कच्चा तेल फिर से भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंच सकता है. रिलायंस इंडस्ट्रीज, नयारा एनर्जी, इंडियन ऑयल और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी जैसी भारतीय रिफाइनरियों के पास भारी कच्चे तेल को संसाधित करने की उन्नत क्षमता मौजूद है. विश्लेषकों के अनुसार वेनेजुएला के तेल की वापसी से वैश्विक बाजार में कीमतों में स्थिरता आएगी और भारत जैसे आयातक देशों को रणनीतिक लाभ मिलेगा.



Source link

Related posts

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर नहीं हो पाया ट्रायल, खराब मौसम बनी वजह, जानें अब कब होगा फ्लाइट टे

DS NEWS

केंद्र सरकार ने बिहार के IPS अधिकारी विनय कुमार को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, NIA के बनाए गए आईजी

DS NEWS

तेजस MK1A के इंजन खरीद की प्रकिया को मिला ‘बूस्टर डोज’, IAF ने उड़ाई चीन-पाकिस्तान की नींद

DS NEWS

Leave a Comment

DS NEWS
The News Times India

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy