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Parliament Winter Session: शीतकालीन सत्र को लेकर हुई सर्वदलीय बैठक, मोदी सरकार लाएगी ये 14 बड़े
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Parliament Winter Session: शीतकालीन सत्र को लेकर हुई सर्वदलीय बैठक, मोदी सरकार लाएगी ये 14 बड़े

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संसद के शीतकालीन सत्र से ठीक एक दिन पहले रविवार (30 नवंबर) को सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया. संसद भवन में हुई इस बैठक में विपक्ष ने अपने एजेंडे के मुद्दे सरकार के सामने रखे, जिनमें दिल्ली धमाका, मतदाता सूची की विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR), विदेशी नीति संबंधी चिंताएं और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषय प्रमुख रहे. वहीं सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं को प्रस्तुत किया और सत्र के सुचारू संचालन में सहयोग की अपील की.

15 बैठकें, सबसे छोटा सत्र? विपक्ष का सवाल

शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा. इस बार सत्र केवल 15 बैठकों का होगा, जो सामान्य तौर पर होने वाले 20 बैठकों के मुकाबले काफी कम है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार सत्र छोटा रखकर संसद को ‘डिरेल’ करना चाहती है.

रिजिजू ने की शांतिपूर्ण चर्चा की अपील

बैठक से पहले संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सभी दलों के नेताओं से अलग-अलग बातचीत की. उन्होंने कहा, “सर्दियों का मौसम है, उम्मीद है सब लोग ठंडे दिमाग से काम करेंगे. बहस हो, लेकिन व्यवधान नहीं. शांत माहौल देश के लिए फायदेमंद होगा और संसद सुचारू चलेगी.”

“सरकार संसदीय परंपराओं को दफना रही है”

सर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर सत्र को छोटा कर रही है. उन्होंने कहा, “कुल 19 दिन के सत्र में केवल 15 दिन चर्चा संभव है. शायद यह अब तक का सबसे छोटा शीतकालीन सत्र होगा. ऐसा लगता है कि सरकार खुद संसद को पटरी से उतारना चाहती है.” उन्होंने आगे कहा, “यह सरकार संसद की परंपराओं को दफनाने में लगी है. इसी वजह से विपक्ष एकजुट है. कल हमारी खड़गे जी के साथ बैठक होगी.”

विपक्ष किन मुद्दों पर चर्चा चाहता है?

गोगोई ने विपक्ष की छह प्रमुख मांगें गिनाईं, जिनमें शामिल थे-

1. दिल्ली धमाके पर बहस- उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा एजेंसियों की विफलता का संकेत है.

2. लोकतांत्रिक सुरक्षा- मतदाता सूची, चुनाव सुरक्षा और SIR प्रक्रिया की समीक्षा.

3. स्वास्थ्य सुरक्षा- देशभर में बढ़ते प्रदूषण पर आपात चर्चा.

4. आर्थिक सुरक्षा- महंगाई और रोजगार पर विस्तृत बहस.

5. प्राकृतिक सुरक्षा- जलवायु संकट को लेकर चर्चा की मांग.

6. विदेश नीति- विपक्ष का आरोप है कि भारत अपनी विदेश नीति दूसरे देशों की शर्तों पर चला रहा है.

लोकसभा और राज्यसभा के लिए 14 विधेयकों की लिस्ट तैयार

सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा के लिए 14 विधेयकों की सूची तैयार की है.

1. जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2025
2. इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (संशोधन) विधेयक, 2025 (IBC)
3. मणिपुर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2025- अध्यादेश बदलने के लिए
4. रीपीलिंग एंड अमेंडिंग बिल, 2025
5. नेशनल हाइवेज (संशोधन) विधेयक, 2025
6. एटॉमिक एनर्जी बिल, 2025
7. कॉरपोरेट लॉज (संशोधन) बिल, 2025
8. सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड बिल (SMC), 2025
9. इंश्योरेंस लॉज (संशोधन) बिल, 2025
10. आर्बिट्रेशन एंड कंसिलिएशन (संशोधन) बिल, 2025
11. हायर एजुकेशन कमिशन ऑफ इंडिया बिल, 2025
12. सेंट्रल एक्साइज (संशोधन) बिल, 2025
13. हेल्थ सिक्योरिटी सेस/नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल, 2025
14. वर्ष 2025-26 के लिए प्रथम पूरक अनुदान मांगें (फाइनेंशियल बिजनेस)

ऑल पार्टी मीटिंग में कौन-कौन से बड़े नेता हुए शामिल

ऑल-पार्टी मीटिंग में कई दलों के शीर्ष नेता शामिल हुए. सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल मौजूद रहे. बीजेपी अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता सदन जे.पी. नड्डा भी बैठक में शामिल हुए.

विपक्ष की तरफ से कांग्रेस के जयराम रमेश, प्रमोद तिवारी और गौरव गोगोई बैठक में पहुंचे. डीएमके से टी.आर. बालू और टी. सिवा, टीएमसी से डेरेक ओ’ब्रायन और कल्याण बनर्जी, IUML के ई.टी. मोहम्मद बशीर, AAP के सुशील गुप्ता, आरजेडी के मनोज झा, BJD के सस्मित पात्रा, YSRCP से मिधुन रेड्डी, समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव, AIADMK से थम्बीदुरई और BAP के राजकुमार रोत उपस्थित रहे.

इसके अलावा शिवसेना (UBT) से मिलिंद देवड़ा, जेडीयू के संजय झा, अकाली दल की हरसिमरत कौर, कमल हासन, अनुप्रिया पटेल, CPI(M) के जॉन ब्रिटास और राजकुमार शावाग जैसे नेता भी बैठक का हिस्सा बने. संसद के दोनों सदनों की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक भी कल शाम 4 बजे आयोजित की जाएगी.

1 से 19 दिसंबर तक चलेगा शीतकालीन सत्र

संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक जारी रहेगा. इस अवधि में कुल 15 कार्यदिवस निर्धारित किए गए हैं. विपक्ष ने सत्र को अपेक्षाकृत छोटा बताते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत और गहन चर्चा की मांग की है. सामान्य परिस्थितियों में शीतकालीन सत्र में लगभग 20 बैठकें आयोजित की जाती हैं.

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