ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए संयुक्त हमले की कड़ी निंदा की है. बोर्ड ने कहा कि यह हमला आक्रामक है और इससे पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में युद्ध का खतरा बढ़ गया है. बोर्ड ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे तुरंत जरूरी कदम उठाकर युद्धविराम कराएं और इस क्षेत्र को बड़े युद्ध में बदलने से रोकें.
बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. एस. क्यू. आर. इलियास ने प्रेस बयान में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत चल रही थी और इसमें अच्छी प्रगति हो चुकी थी. ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे, उनके अनुसार ईरान अमेरिका की लगभग सभी शर्तों पर सहमत हो गया था. इसके बावजूद अमेरिका ने अचानक बातचीत खत्म करने की घोषणा की और तुरंत इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला कर दिया. इससे साफ होता है कि बातचीत केवल एक बहाना था और असल में हमला पहले से तय था.
Strong Condemnation of Open Aggression by the United States and Israel Against Iran.
United Nations Must Ensure Immediate Ceasefire and Intervention
All India Muslim Personal Law BoardThe All India Muslim Personal Law Board strongly and unequivocally condemns the joint and open… pic.twitter.com/F65OlA2G7s
— All India Muslim Personal Law Board (@AIMPLB_Official) March 5, 2026
अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत पर गहरा दुख
डॉ. इलियास ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत पर गहरा दुख जताया और इसे पूरी मुस्लिम दुनिया के लिए बहुत बड़ी क्षति बताया. उन्होंने कहा कि किसी स्वतंत्र देश के सर्वोच्च नेतृत्व को युद्ध के दौरान निशाना बनाना और खुले तौर पर सरकार बदलने की बात करना अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का सीधा उल्लंघन है. उन्होंने यह भी कहा कि इस युद्ध ने पूरे मध्य-पूर्व को अस्थिर कर दिया है. कई यूरोपीय देश अमेरिका का समर्थन कर रहे हैं, जबकि रूस और चीन ईरान के साथ खड़े हैं. अगर तुरंत कूटनीतिक हस्तक्षेप नहीं किया गया तो यह संघर्ष एक बड़े वैश्विक युद्ध में बदल सकता है. लंबे समय तक चलने वाला युद्ध न केवल मानवीय संकट को और गहरा करेगा बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाएगा. इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और विकासशील देशों पर पड़ेगा.
डॉ इलियास ने जताया अफसोस
डॉ इलियास ने अफसोस जताया कि इस गंभीर समय पर भारत एक संतुलित और सम्मानजनक मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता था, लेकिन मौजूदा रुख से देश की विदेश नीति की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है. उन्होंने यह भी चिंता जताई कि अयातुल्लाह खामेनेई की मौत पर भारत की ओर से कोई आधिकारिक शोक संदेश जारी नहीं किया गया, जो नैतिक और कूटनीतिक परंपराओं के खिलाफ है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक बार फिर भारत सरकार, संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे तुरंत गंभीर और व्यावहारिक कदम उठाकर इस युद्ध को रोकें. बोर्ड ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो यह आग सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी और इसके असर से कोई भी देश बच नहीं पाएगा.


