भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव लाने वाले नोटिस को गुरुवार (12 मार्च) को संसद से दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में सौंपा जा सकता है. प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस पर जरूरी हस्ताक्षर की प्रक्रिया बुधवार (11 मार्च) को पूरी कर ली गई. यह पहला मौका है जब किसी मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से हटाने के लिए कोई नोटिस दिया जा रहा है.
कितने सांसदों ने नोटिस पर किए साइन?
पीटीआई को एक सूत्र ने यह जानकारी दी है. मामले को लेकर एक बड़े सांसद की ओर कहा गया कि हस्ताक्षर का काम पूरा कर लिया गया है, बताया गया कि बुधवार शाम तक करीब 120 सांसदों ने लोकसभा में दिए जाने वाले नोटिस पर साइन किए हैं, जबकि राज्यसभा के लिए करीब 60 सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं. बताया गया कि नोटिस पर ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी घटक दलों के सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हैं.
नोटिस लाने का क्या है नियम?
बता दें कि नियमों के मुताबिक लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर का नोटिस देना होता है. नोटिस को गुरुवार को सौंपा जा सकता है, जिसे संसद के दोनों सदनों में दिया जाएगा.
CEC के खिलाफ क्यों नोटिस दे रहा विपक्ष?
दरअसल, विपक्षी दलों ने कई मौकों पर ऐसे आरोप लगाए हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने सत्ता पर काबिज बीजेपी को फायदा पहुंचाया. इसके अलावा एसआईआर को लेकर भी विपक्ष ने सीईसी पर निशाना साधा है. विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर का उद्देश्य भाजपा की मदद करना है.
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की क्या है प्रक्रिया?
कानून के मुताबिक, सीईसी को हटाने के लिए वही प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए है. मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अनुशंसा के बिना अन्य निर्वाचन आयुक्तों को पद से नहीं हटाया जा सकता. न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के अनुसार, किसी भी सदन में, जज को पद से हटाने का प्रस्ताव स्वीकृत हो जाने के बाद, (लोकसभा) अध्यक्ष या (राज्यसभा) सभापति, जैसा भी मामला हो, तीन सदस्यीय समिति का गठन करेंगे. जो उन आधारों की जांच करेगी, जिन पर पद से उन्हें हटाने की मांग की गई है.
समिति में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) या शीर्ष न्यायालय के जज, 25 उच्च न्यायालयों में से किसी एक के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित न्यायविद होते हैं.
समिति की कार्यवाही किसी भी अदालती कार्यवाही की तरह होती है, जिसमें गवाहों और आरोपियों से जिरह की जाती है. सीईसी को भी समिति के समक्ष बोलने का अवसर मिलता है. नियम के अनुसार, समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद, इसे सदन में पेश किया जाएगा और पद से हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हो जाएगी. हालांकि, सीईसी को अपना बचाव करने का अधिकार होता है.


