फिल्मों हो या ओटीटी, गंभीर किरदार हों या किसी कहानी में गहरी परतें—Rasika Dugal उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में हैं जो अपने अभिनय की बारीकियों से दर्शकों पर स्थायी प्रभाव छोड़ती हैं।
उनकी परफॉर्मेंस में जो सहजता, संवेदनशीलता और मौलिकता दिखाई देती है, आज वह हिंदी कंटेंट इंडस्ट्री के लिए एक सशक्त स्तंभ बन चुकी हैं।
Rasika Dugal Delhi Crime 3 स्ट्रीम होते ही चर्चा में है और इस बार भी उनके किरदार “नीती सिंह” ने दर्शकों के दिलों में उत्सुकता और सम्मान दोनों पैदा कर दिया है।
दिल्ली क्राइम सीजन 3 में नीती सिंह—इस बार और ज्यादा तीक्ष्ण, बहादुर और जटिल
“Delhi Crime 3 में नीती सिंह एक ऐसे मोड़ पर खड़ी हैं जहां फैसले आसान नहीं होंगे, और सामाजिक दबाव पहले से ज्यादा भारी होगा।”—यह कहना है रसिका का, जो इस बार अपने किरदार को नए स्तर की परिपक्वता और साहस प्रदान करती दिखेंगी।
पहले दो सीजन में जहां नीती सिंह एक युवा अधिकारी के रूप में सिस्टम को समझने, उसके भीतर काम करने और खुद को ढालने की कोशिश कर रही थीं, वहीं इस बार वह सच्चाई और न्याय के बीच सबसे कठिन चुनौतियों से जूझेंगी।
उनकी यात्रा—
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ज्यादा वास्तविक होगी
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ज्यादा दर्द और द्वंद्व दिखाएगी
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और पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली होगी
दर्शक इस बार नीती को ऐसे निर्णय लेते देखेंगे जो सिर्फ पेशेवर नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी बहुत साहसी हैं।
कैरेक्टर की तैयारी—रियल ऑफिसर के साथ बिताया समय, बॉडी लैंग्वेज से लेकर व्यवहार तक गहराई से अध्ययन
सीजन 1 में जब रसिका ने प्रोबेशनरी ऑफिसर का किरदार निभाया था, तब उनकी मुलाकात असल जीवन की एक प्रोबेशन अधिकारी से करवाई गई थी—जिन्हें शो के एडवाइजर और निर्भया केस के समय दिल्ली के कमिश्नर रहे नीरज कुमार ने उनसे मिलवाया था।
रसिका बताती हैं कि वे ऑफिसर—
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अनुशासन में सख्त
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व्यवहार में दृढ़
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और वर्दी की मर्यादा को सर्वोपरि मानने वाली थीं
सीजन 2 तक वह अधिकारी एसीपी बन चुकी थीं, और रसिका कई बार उनके पास चंडीगढ़ गईं, उनका वर्क स्टाइल, बॉडी लैंग्वेज, कमांड टोन और व्यवहारिक रफ्तार समझती रहीं।
दिलचस्प बात यह है कि सीजन 3 में किरदार का प्रमोशन नहीं हुआ, पर असली जीवन में अधिकारी आगे बढ़ चुकी थीं—
“मैं उन्हें ढूंढने नहीं गई थी, लेकिन वे लगभग नीती सिंह जैसी ही आदर्शवादी और ईमानदार थीं।”
Rasika Dugal Delhi Crime 3—13 नवंबर 2025 को रिलीज, नेटफ्लिक्स पर वापसी
तीसरे सीजन में वापसी को लेकर रसिका कहती हैं कि यह किरदार उनके सबसे करीब है।
नीती का विकास, उसका संघर्ष, उसकी मानवता—सब कुछ इस सीजन में कहीं अधिक परतदार तरीके से सामने आता है।
दर्शकों को यह दिखेगा कि एक महिला अधिकारी का सफर सिर्फ डेस्क या फील्ड तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह अपने निजी जीवन, भावनात्मक थकान और पेशेवर जिम्मेदारियों को संतुलित करते हुए कैसे आगे बढ़ती है।
कौन-सी स्क्रिप्ट बनी करियर का टर्निंग पॉइंट?—रसिका का बड़ा खुलासा
आम धारणा है कि रसिका के लिए “मिर्जापुर” या “दिल्ली क्राइम” टर्निंग पॉइंट रहे।
लेकिन वे साफ कहती हैं—
“मेरा निर्णायक मोड़ मंटो था।”
मंटो से पहले उन्होंने—
में काम किया था, लेकिन निर्माता उन्हें “सेलेबल नहीं” मानते थे।
तभी नंदिता दास ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें वह मौका दिया जिसने उनका करियर पूरी तरह बदल दिया।
फिर आए—
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दिल्ली क्राइम
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मिर्जापुर
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और ओटीटी की कई भारी-भरकम स्क्रिप्ट्स
जिससे उनकी पहचान देश–विदेश में फैल गई।
मंटो में रिजेक्ट होने के बाद कैसे मिली भूमिका?—रसिका की संघर्षगाथा प्रेरणादायक
बहुत कम लोगों को पता है कि रसिका को पहले मंटो में रिजेक्ट कर दिया गया था।
लेकिन नंदिता दास ने कहा—
“तुम इस किरदार के लिए सही हो, और तुम इसे कर सकती हो।”
यही विश्वास रसिका के लिए नई दिशा साबित हुआ।
आज जब लोग उनकी परफॉर्मेंस की परतें देखते हैं, तो उन्हें भी यकीन नहीं होता कि किसी समय वे “मार्केटेबल चेहरा नहीं” मानी जाती थीं।
मिर्जापुर—संयोग या मेहनत? दोनों का अनोखा मिश्रण
मिर्जापुर की कास्टिंग कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है।
सीजन 1 के क्रिएटर करण अंशुमन, जो उनके दोस्त भी हैं, किसी नए प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे।
रसिका हिचकिचाईं, पर फिर मैसेज कर दिया।
हमेशा की तरह—
सबके बीच एक संतुलन बना।
ऑडिशन के बाद उन्हें लगा कि वे रिजेक्ट हो जाएंगी।
लेकिन प्रोड्यूसर अब्बास ने कहा—
“चिंता मत करो, तुमने बहुत अच्छा किया है।”
और अगला कॉल—सेलेक्शन का था।
बोल्ड सीन पर क्या झिझक थी?—रसिका ने बिना किसी लाग-लपेट के दिया जवाब
रसिका साफ कहती हैं—
“स्क्रिप्ट के लिए जो जरूरी था, वही किया गया। न ज़्यादा, न कम।”
उन्होंने बताया कि—
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इंटिमेट सीन की हर डिटेल पहले ही डिसकस की गई
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क्लोज सेट की व्यवस्था सुनिश्चित की गई
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को-एक्टर्स और टीम के साथ पूरी पारदर्शिता रखी गई
उन्होंने कहा कि—
“आज इंटिमेसी कोऑर्डिनेटर हैं, तब नहीं थे, लेकिन हमारी टीम बेहद संवेदनशील थी।”
ओटीटी और फिल्मों में सबसे बड़ा अंतर—समय, रफ्तार और किरदार की गहराई
फिल्मों और ओटीटी दोनों में काम कर चुकी रसिका कहती हैं—
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फिल्मों में किरदार को जीने, समझने और तैयारी करने का समय मिलता है
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ओटीटी में एक दिन में कई–कई सीन शूट करने होते हैं, रफ्तार बहुत तेज होती है
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लेकिन ओटीटी की खूबसूरती है कि “किरदारों को एक लंबी यात्रा मिलती है”
इसी वजह से “मिर्जापुर” में उनका किरदार स्क्रीन टाइम से ज्यादा प्रभाव छोड़ता है—क्योंकि उसका ट्रैक गहराई से दिखाया गया।
अगर एक्टिंग में न आतीं तो क्या करतीं?—रसिका का खूबसूरत जवाब
रसिका मुस्कुराकर कहती हैं—
“अगले जन्म में शायद म्यूज़िशियन बनूं।”
उन्होंने बताया कि—
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एक फिल्म के लिए उन्होंने पियानो सीखना शुरू किया था
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बाद में अन्य शूटिंग्स के कारण रोकना पड़ा
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आज वही जुनून उनके पति पूरा करते हैं
लेकिन वे इस बात पर पूरी तरह स्पष्ट हैं—
“FTII से निकलते ही तय कर लिया था कि एक्टर ही बनना है। यह मेरी पहचान और मेरा उद्देश्य है।”
रसिका दुग्गल आज उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल हैं जो हर भूमिका को एक नई परिभाषा देती हैं। ‘Rasika Dugal Delhi Crime 3’ में उनकी वापसी इस बात का प्रमाण है कि ईमानदार अभिनय, शोधपूर्ण तैयारी और कला का समर्पण हमेशा दर्शकों तक गहरी छाप छोड़ता है। मंटो से लेकर मिर्जापुर और अब दिल्ली क्राइम—रसिका का सफर प्रेरणादायक ही नहीं, बल्कि उन सभी युवा कलाकारों के लिए मार्गदर्शक है जो सपनों को मेहनत से पूरा करना चाहते हैं।


