मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने बिल्डर माफिया और नौकरशाहों के बीच मिलीभगत के परिणामस्वरूप चंडीगढ़ की प्रतिष्ठित झील के सूखने पर चिंता जताते हुए बुधवार (21 जनवरी, 2026) को टिप्पणी की कि सुखना झील को और कितना सुखाओगे.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच 1995 में लंबित जनहित याचिका ‘इन रे: टीएन गोदावर्मन थिरुमुलपाद’ में दायर अंतरिम आवेदनों की सुनवाई कर रही थी.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक अधिवक्ता की ओर से झील से संबंधित याचिका का उल्लेख करने पर मौखिक टिप्पणी की, ‘और कितना सुखाओगे सुखना लेक (झील) को? पंजाब में राजनीतिक दलों के समर्थन और नौकरशाहों की मिलीभगत से अवैध निर्माण हो रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप झील पूरी तरह से नष्ट हो रही है. वहां सभी बिल्डर माफिया सक्रिय हैं.’
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त किया था कि जंगलों और झीलों से संबंधित सभी मामले हाईकोर्ट्स को दरकिनार करते हुए सुप्रीम कोर्ट में क्यों आ रहे हैं, वह भी 1995 की लंबित जनहित याचिका में अंतरिम आवेदनों के रूप में. बेंच ने सुनवाई के शुरुआत में आश्चर्य व्यक्त किया कि वन संबंधी सभी मामले इसी अदालत में क्यों आ रहे हैं?
मुख्य न्यायाधीश ने सुखना झील मामले से संबंधित एक आवेदन का जिक्र करते हुए कहा था कि जाहिर तौर पर ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ निजी डेवलपर्स और अन्य लोगों के इशारे पर दोस्ताना मुकाबला चल रहा है.
बेंच ने केंद्र की ओर से पेश हुई अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और वन मामले में न्यायमित्र की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ अधिवक्ता के परमेश्वर से उन स्थानीय मुद्दों के बारे में जानकारी देने को कहा था, जिनसे हाईकोर्ट स्वयं निपट सकते हैं.
चंडीगढ़ की सुखना झील से संबंधित मुकदमा मुख्य रूप से हाईकोर्ट की ओर से इसके जलग्रहण क्षेत्र को अतिक्रमण से बचाने के प्रयासों से जुड़ा है, जिसमें 2020 में संरक्षित क्षेत्र में बनी संरचनाओं को ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था.
यह भी पढ़ें:-
‘कुछ ही घंटों में तबाह कर घुटनों पर ला देंगे…’, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की पाकिस्तान को सख्त चेतावनी!


