सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (19 जनवरी, 2026) को राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें राज्य सरकार को राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से 500 मीटर के दायरे में आने वाली सभी शराब की दुकानों को हटाने का निर्देश दिया गया था. उच्च न्यायालय ने सड़क हादसों में हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए यह आदेश दिया था.
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने शराब विक्रेताओं और राजस्थान सरकार की याचिकाओं पर नोटिस जारी किया. हालांकि, पीठ ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय की चिंता वाजिब थी और सरकार भविष्य में अपनी आबकारी नीति बनाते समय इस पर विचार कर सकती है.
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया, ‘नोटिस जारी किया जाए. चुनौती दिए गए आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाती है.’ राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले निर्देश दिया था कि राजमार्गों से 500 मीटर के भीतर शराब की दुकानें नहीं होनी चाहिए, लेकिन समस्या वहां पैदा हुई जहां ये सड़कें शहरों से होकर गुजरती हैं. उन्होंने कहा, ‘बाद में आदेश में स्पष्ट किया गया था कि नगर निकाय (नगर पालिका/ नगर निगम) की सीमा के भीतर शराब की दुकानों पर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं होगा.’
शराब दुकान मालिकों की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को सुने बिना आदेश पारित करने में गलती की है. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट सुजानगढ़ गांव से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रहा था, लेकिन उसने अन्य पक्षों को सुने बिना पूरे राज्य के लिए आदेश जारी कर दिया.
इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि हाईकोर्ट का अधिकार क्षेत्र पूरे राज्य में होता है. रोहतगी ने अपनी दलील जारी रखते हुए कहा कि हाईकोर्ट का नजरिया सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के विपरीत था, जिसमें कहा गया था कि नगर निकाय सीमा के भीतर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है.


