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‘अगर सेना न टूटती, अगर कुछ सदस्य…’, BMC और महाराष्ट्र के नतीजों में क्या है ‘अगर’ का चक्कर
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‘अगर सेना न टूटती, अगर कुछ सदस्य…’, BMC और महाराष्ट्र के नतीजों में क्या है ‘अगर’ का चक्कर

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मुंबई के हाई-स्टेक स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजों ने महाराष्ट्र में एक बात को पूरी तरह से साफ कर दिया है कि पिछले 25 सालों से चली रही ठाकरे परिवार की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर पकड़ को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तोड़ दिया है. यह भारत की आर्थिक राजधानी की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है.

इस चुनाव के आंकड़े अपनी कहानी खुद कह रहे हैं. राज्य और केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब देश की सबसे अमीर नगर निकाय में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिसके पास कुल 89 सीटें हैं. इसके साथ एकनाथ शिंदे की शिवसेना को जोड़ दें तो दोनों मिलाकर 227 सदस्यीय सदन में बहुतम के आंकड़े 114 को पार कर जाते हैं, लेकिन इन आंकड़ों के पीछे कई ‘अगर’ और राजनीतिक अटकलों से भरा चक्कर है.

अगर शिवसेना एकजुट होती?

BMC चुनाव के नतीजों के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि अगर शिवसेना एकजुट रहती तो चुनाव के नतीजों में आंकड़ों की तस्वीर कुछ अलग हो सकती थी. जहां, इस बार चुनाव में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने कुल 65 सीटें जीतीं, जबकि राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना को मात्र 29 सीटें मिलीं. वहीं, अगर यह गुट एक साथ होते, तो कुल आंकड़ां 94 सीटों का होता, जो भाजपा के 89 सीटों से ज्यादा है. ऐसे में शिवसेना को कांग्रेस जैसे किसी सहयोगी दल का समर्थन मिलने पर बहुमत आसानी से मिल जाता.

शिवसेना की संयुक्त ताकत पर कई मंत्रियों ने दिए बयान

शिवसेना (यूबीटी) गुट के नेता सुनील प्रभु ने कहा कि भाजपा की जीत सिर्फ इसलिए मुमकिन हो सकी, क्योंकि शिवसेना का विभाजन कर दिया गया. वहीं, कांग्रेस के पूर्व नेता संजय झा ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इसी बात को दोहराया. उन्होंने कहा कि दोनों शिवसेनाओं की संयुक्त ताकत आज भी मजबूत है. अगर शिवसेना एकजुट होती, तो BMC चुनाव में भाजपा का कोई मौका नहीं था. 

दलबदल की आशंका के बीच किसके पास कितना समर्थन?

BMC चुनाव के नतीजों के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने सभी पार्षदों को एक होटल में ठहरा दिया, जो दलबदल की आशंका के समय आम राजनीतिक रणनीति मानी जाती है. इससे संकेत मिलता है कि सीटों का गणित अभी किसी और दिशा में भी जा सकता है.

वहीं, भाजपा और उपमुख्यमंत्री शिंदे की शिवसेना के पास मिलकर 118 सीटें हैं, जो बहुमत के 114 के आंकड़े से ऊपर है. इसके अलावा, उपमुख्यमंत्री अजित पवार की NCP, हालांकि उसने अकेले चुनाव लड़ा, के पास 3 सीटें हैं. इस तरह कुल संख्या 121 तक पहुंच जाती है, जो काफी आरामदेह स्थिति है.

दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की शिवसेनाओं के पास मिलकर 71 सीटें हैं, साथ ही पूर्व-चुनाव सहयोगी NCP (SP) की एक सीट. अगर कांग्रेस भी साथ आ जाए, तो उसमें 24 सीटें और जुड़ जाएंगी यानी कुल 96 सीटें हो जाएंगी. अगर अन्य भाजपा-विरोधी पार्टियां, जैसे असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM की 8 सीटें और समाजवादी पार्टी की 2 सीटें, तो आंकड़ा 106 तक पहुंच सकता है, जो बहुमत से सिर्फ 8 सीटें कम है.

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