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SIR की नई लिस्ट में गजब कारनामा! उत्तर प्रदेश के कांग्रेस नेता के पूरे परिवार का नाम गायब
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SIR की नई लिस्ट में गजब कारनामा! उत्तर प्रदेश के कांग्रेस नेता के पूरे परिवार का नाम गायब

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उत्तरप्रदेश में एसआईआर को लेकर फाइनल सूची जारी की गई है. इसके आते ही बवाल मच गया है. इस लिस्ट में करीबन 3 करोड़ वोटर्स के नाम काटे गए है. अब ऐसे में कांग्रेस के नेता ने आरोप लगाया है कि इस सूची में उनके पूरे परिवार का नाम गायब है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के सहारे कई तरह के सवाल एसआईआर की प्रक्रिया पर खड़े किए हैं.

क्या है पूरा मामला? 
उत्तरप्रदेश में मंगलवार को एसआईआर की फाइनल सूची जारी की गई. इसमें दो करोड़ 89 लाख वोटर्स के नाम काटे गए हैं. इस सूची में कांग्रेस के नेता और एडमिन हेड प्रमुख गुरदीप सिंह सप्पल और उनके परिवार का नाम गायब है. गुरदीप सप्पल ने एबीपी न्यूज से इस मामले में खास बातचीत की है.  

‘कांग्रेसी होने के कारण किया गया टारगेट’

उन्होंने इसको लेकर कहा है कि कांग्रेसी होने को लेकर टारगेट किया गया है. पूरे परिवार का नाम काटा गया है. चुनाव आयोग मोदी सरकार के इशारे पर काम कर रही है. कांग्रेस पार्टी में जिनका नाम काटा गया है, उनको फिर से जुड़वाने को लेकर जमीन पर उतरेगी. मोदी सरकार का काम सभी को लाइनों में लगवाना है. 

 

उन्होंने कहा कि मैं फॉर्म 6 भरूंगा. हमारे नाम 2003 की वोटर्स में शामिल थे. हमारे नाम पिछले चुनाव की वोटर लिस्ट में भी शामिल थे. हमारे माता-पिता के नाम भी 2003 की वोटर लिस्ट में शामिल थे. हमने चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार जरूरी दस्तावेज भी जमा कर दिए थे. हमारे पास पासपोर्ट, जन्म सर्टिफिकेट, आधार, बैंक खाता, प्रॉपर्टी पेपर, दसवीं के सर्टिफिकेट सभी कुछ है.  

 

उन्होंने कहा, ‘मैं तो स्वयं भारत के उपराष्ट्रपति के साथ और राज्यसभा सचिवालय में जॉइंट सेक्रेटरी भी था. साथ ही कांग्रेस की सर्वोच्च कमेटी CWC का सदस्य हूं. यही नहीं SIR और अन्य मुद्दों पर चुनाव आयोग में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा भी कई बार रहा हूं. ये सब BLO भी जानते हैं. लेकिन फिर भी हमारे नाम ड्राफ्ट लिस्ट से कट गए.’

नाम काटने के पीछे की वजह क्या है?
गुरदीप सिंह सप्पल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया है, ‘हमने अपना घर उत्तर प्रदेश की साहिबाबाद विधानसभा से नोएडा विधान सभा शिफ्ट कर लिया था. हमें बताया गया कि SIR में शिफ्ट हुए वोटरों का नाम बरकरार रखने का कोई प्रावधान नहीं है. मतलब, अगर किसी वोटर ने अपना घर किसी नए इलाके में बदल लिया है, तो उसका नाम काट दिया गया है. मेरे जैसे करोड़ों वोटर हैं. मैं तो शायद  फिर भी नया फॉर्म 6 भर कर अपने परिवार नाम जुड़वा लूंगा, लेकिन कितने लोग ऐसा कर पायेंगे? यही है SIR की सच्चाई!’





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