हिमाचल प्रदेश के शिमला की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने फर्जी डिग्री घोटाले के एक बड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने अशोनी कंवर नाम की एक महिला और उसके बेटे मनदीप राणा को भगोड़ा घोषित कर दिया है. उनपर पर आर्थिक अपराध के मामले में ईडी की कार्रवाई चल रही है. अदालत ने 3 जनवरी 2026 को ईडी शिमला सब जोनल ऑफिस की याचिका पर फैसला दिया है.
FIR के आधार पर शुरू हई थी जांच
ED ने ये जांच धर्मपुर पुलिस स्टेशन, जिला सोलन हिमाचल प्रदेश में दर्ज तीन FIR के आधार पर शुरू की थी. जांच में खुलासा हुआ कि राज कुमार राणा ने अपनी पत्नी अशोनी कंवर और बेटे मनदीप राणा के साथ मिलकर एजेंटों और छात्रों को पैसे लेकर फर्जी डिग्रियां बेची. ये डिग्रियां मानव भारती विश्वविद्यालय, सोलन के नाम पर जारी की जाती थी.
लगभग 4 अरब की अवैध कमाई, कई संपत्ति अटैच
ED की जांच के मुताबिक, इस फर्जीवाड़े से करीब 387 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई. इस पैसे से आरोपियों ने कई राज्यों में अपने और रिश्तेदारों के नाम पर चल-अचल संपत्तियां खरीदी. अब तक ED ने करीब 200 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर ली है.
14 लोगों के खिलाफ ईडी दाखिल कर चुकी चार्जशीट
इस मामले में ED पहले ही 14 लोगों और 2 संस्थाओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. 4 जनवरी 2023 को अदालत ने संज्ञान लेते हुए अशोनी कंवर और मनदीप राणा को समन जारी किए, लेकिन वे पेश नहीं हुए. इसके बाद 4 नवंबर 2023 को उनके खिलाफ ओपन-एंडेड नॉन-बेलेबल वारंट जारी किए गए.
मां-बेटे देश छोड़ ऑस्ट्रेलिया शिफ्ट हुए
जांच में ये भी सामने आया कि FIR दर्ज होने के बाद ही दोनों आरोपी देश छोड़कर ऑस्ट्रेलिया चले गए और वहीं रह रहे है. ED के बार-बार समन के बावजूद वे जांच में शामिल नहीं हुए और भारत लौटने से इनकार करते रहे.
इन तथ्यों के आधार पर ED ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 की धारा 4 के तहत आवेदन दायर किया. शिमला की स्पेशल PMLA कोर्ट ने ED की दलीलों से सहमति जताते हुए 3 जनवरी 2026 को अशोनी कंवर और मनदीप राणा को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया.ED का कहना है कि इस मामले में आगे की जांच जारी है.


