तेलंगाना में माओवादी उग्रवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को बड़ी सफलता मिली है. पिछले दो सालों के दौरान पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई का असर दिखने लगा है, जिसका परिणाम यह हुआ है कि एक बड़ी संख्या में माओवादी जंगलों को छोड़कर मुख्यधारा में लौट आए हैं. यह आंकड़ा सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि उग्रवादियों के ढांचे के टूटने का संकेत है.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, गत दो वर्षों में कुल 576 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है. इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये लोग खाली हाथ नहीं आए हैं. उन्होंने पुलिस के समक्ष कुल 144 उच्च क्वालिटी के हथियार डाले हैं. सामरिक दृष्टि से यह एक बड़ी व्यवधान है, क्योंकि ये हथियार अब सुरक्षा बलों के हाथ में आ चुके हैं.
इस सरेंडर की सबसे बड़ी खासियत इसमें शामिल लोगों का पद है. यह कोई आम कैडर नहीं, बल्कि संगठन के शीर्ष स्तर के नेता हैं. आत्मसमर्पण करने वालों में माओवादी पार्टी की सेंट्रल कमेटी के चार सदस्य और स्टेट कमेटी के पांच सदस्य शामिल हैं. जब संगठन की रीढ़ कही जाने वाली टॉप कमेटी के सदस्य ही रास्ता बदल रहे हैं, तो यह साफ दर्शाता है कि जंगलों में छिपे अन्य सदस्यों का मनोबल किस स्तर पर होगा.
तेलंगाना के डीजीपी ने की अपील
तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP) शिवधर रेड्डी ने इस मौके पर अपील जारी करते हुए कहा कि अब समय बीत रहा है और जो लोग अभी भी जंगलों में छिपे हैं, उन्हें तुरंत बाहर आना चाहिए. डीजीपी ने तर्क देते हुए कहा, ‘जिन लोगों का आप नेतृत्व कर रहे हैं, अगर वे खुद ही आत्मसमर्पण कर चुके हैं, तो अब आपका वहां रहने का कोई औचित्य नहीं रह गया है. विचार करें और मुख्यधारा में शामिल हों.’
जब शीर्ष नेतृत्व ही हथियार डाल देता है, तो फौजी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं के लिए संघर्ष जारी रखना मुश्किल हो जाता है. पुलिस प्रशासन का मानना है कि यह शांति और विकास की दिशा में उठाया गया एक सकारात्मक कदम है.
यह भी पढ़ेंः कांग्रेस ने 5 राज्यों के लिए बनाई स्क्रीनिंग कमेटी, प्रियंका गांधी को किस राज्य की मिली जिम्मेदारी?


