बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. पिछले सप्ताह शुक्रवार (19 दिसंबर 2025) को बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में कथित ईशनिंदा के आरोप में कट्टरवादी भीड़ ने एक हिंदू युवक दीपु चंद्र दास को पीट-पीटकर और जिंदा जलाकर हत्या कर दी.
इसके बाद राजबाड़ी जिले में भी कट्टरवादी भीड़ ने 29 वर्षीय अमृत मंडल उर्फ सम्राट की बेरहमी से हत्या कर दी. इन घटनाओं के बीच भारत में ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी का एक विवादित बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा को नरसंहार कहना सही नहीं है.
‘गाजा में जो हुआ, क्या उसे नरसंहार नहीं कहेंगे?’
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि बांग्लादेश में हो रही हत्याएं गलत हैं और इसमें कोई संदेह नहीं है. उन्होंने कहा कि इस्लाम किसी की हत्या की इजाजत नहीं देता, लेकिन जो लोग इन घटनाओं को नरसंहार बता रहे हैं, उनसे पूछा जाना चाहिए कि नरसंहार आखिर है कहां? उन्होंने आगे कहा कि गाजा में जो हुआ, क्या आप उसे नरसंहार कहने को तैयार हैं? फिलिस्तीन में 40 हजार बच्चों की हत्या हुई और करीब 1 लाख 50 हजार लोगों की जान गई, लेकिन फिर भी उसे नरसंहार कहने से परहेज किया जाता है.
#WATCH | Delhi: On the Bangladesh unrest, All India Imam Association President Maulana Sajid Rashidi says, “The killings that are happening are wrong. There is no doubt about that. Islam does not advocate killing anyone. But those who are calling this genocide, where is the… pic.twitter.com/YRlK7LqWFU
— ANI (@ANI) December 25, 2025
‘भारत में 52 लोगों की हत्या नरसंहार क्यों नहीं?’
न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि बांग्लादेश में जो कुछ हो रहा है, उसके लिए वहां की यूनुस सरकार जिम्मेदार है, जो एक कमजोर सरकार है. उन्होंने आरोप लगाया कि इसे नरसंहार इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि वहां मरने वाले लोग हिंदू हैं. उन्होंने आगे कहा कि NCRB के आंकड़ों के मुताबिक भारत में ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने वाली भीड़ द्वारा 52 लोगों की मॉब लिंचिंग की गई, लेकिन उसे नरसंहार नहीं कहा जाता. उन्होंने सवाल उठाया कि 50 से अधिक लोगों की हत्या को नरसंहार मानने में हिचक क्यों होती है? क्या यह दोहरी मानसिकता नहीं है?
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