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कर्नाटक में कबूतरों को दाना डालने पर सख्ती, जानें स्वास्थ्य विभाग ने क्यों जताई चिंता
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कर्नाटक में कबूतरों को दाना डालने पर सख्ती, जानें स्वास्थ्य विभाग ने क्यों जताई चिंता

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कर्नाटक के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना डालने से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए सख्त कदम उठाने की सिफारिश की है. विभाग ने शहरी विकास विभाग (UDD) से ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) और राज्य के सभी नगर निगमों को इस संबंध में स्पष्ट और कड़े दिशा-निर्देश लागू करने के निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है.

विभाग के उप सचिव वी. लक्ष्मीनाथ ने UDD को पत्र लिखकर सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को खाना खिलाने पर रोक लगाने और इसे सख्ती से रेगुलेट करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा है. पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जिन इलाकों में कबूतरों की वजह से लोगों को असुविधा या स्वास्थ्य को खतरा है, वहां दाना डालने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए.

स्वास्थ्य विभाग ने नियमों को लेकर क्या कहा?

पत्र के अनुसार, कबूतरों को दाना डालने की अनुमति केवल चिह्नित और निर्धारित स्थानों पर ही दी जा सकती है. यह अनुमति भी नियंत्रित परिस्थितियों में, सीमित समय के लिए होगी. ऐसे स्थानों की निगरानी और प्रबंधन की जिम्मेदारी किसी चैरिटेबल संस्था या NGO को सौंपी जा सकती है.

विभाग ने स्थानीय अधिकारियों को नियमों के उल्लंघन पर मौके पर ही चेतावनी देने, जुर्माना लगाने या कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार देने की भी सिफारिश की है. इसके साथ ही नगर निगमों को निर्देश दिया गया है कि वे नागरिकों को कबूतरों से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों, नियमों, दंडात्मक प्रावधानों और पक्षियों की देखभाल के वैकल्पिक मानवीय तरीकों के बारे में जागरूक करने के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाएं.

कमजोर और संवेदनशील लोगों पर पड़ सकता है ज्यादा असर

विभाग की ओर से मंगलवार (16 दिसंबर, 2025) को लिखे गए इस पत्र में घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में कबूतरों की बढ़ती संख्या, उनकी बीट और पंखों से फैलने वाले खतरों को इस कदम का प्रमुख कारण बताया गया है. चिकित्सा विशेषज्ञों की चेतावनी का हवाला देते हुए कहा कि कबूतरों की बीट और पंखों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनिटिस, सांस संबंधी गंभीर बीमारियां और फेफड़ों को स्थायी नुकसान तक हो सकता है और इसका खतरा खासकर कमजोर और संवेदनशील लोगों में ज्यादा हो सकता है.

निर्देशों के उल्लंघन पर जुर्माने के साथ कैद की सजा का प्रावधान

विभाग ने यह भी बताया कि सार्वजनिक स्थानों पर दाना डालने से कबूतरों की आबादी में असामान्य वृद्धि हुई है, जिससे उनके मूत्र और बीट के जरिए संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है. इन्हीं कारणों से सरकार ने सार्वजनिक जगहों पर कबूतरों को खाना खिलाने पर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनके उल्लंघन पर जुर्माना या जेल की सजा तक का प्रावधान हो सकता है.

पत्र में बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद ग्रेटर मुंबई नगर निगम की ओर से अपनाए गए ऐसे ही नियामक उपायों का भी उल्लेख किया गया है. स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे इन दिशानिर्देशों को गंभीरता से लें और समुदाय की सेहत व सुरक्षा के हित में इनका पालन करें.

यह भी पढ़ेंः डंकी रूट केस में ED का बड़ा एक्शन, पंजाब-हरियाणा-दिल्ली में 13 ठिकानों पर एक साथ की ताबड़तोड़ छापेमारी



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