Tamil Nadu News: तमिलनाडु में पोंगल सबसे बड़ा और सबसे खास त्योहार माना जाता है. हर साल सरकार लाखों परिवारों को पोंगल उपहार पैकेज देती है. इसमें चावल, गन्ना, चीनी जैसे सामान शामिल होते हैं. इस साल सरकार इससे भी बड़ा कदम उठाने पर विचार कर रही है. जानकारी के अनुसार, पोंगल पैकेज के साथ परिवार कार्डधारकों को 3 हजार रुपये नकद देने का प्रस्ताव तैयार हो रहा है.
चुनाव से पहले बड़ा फैसला?
अगले वर्ष तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में सरकार चाहती है कि पोंगल पर लोगों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले. राज्य में लगभग 2.25 करोड़ परिवार कार्डधारक हैं. इन सभी को पोंगल उपहार पैकेज के साथ नकद राशि देने की योजना पर काम चल रहा है. सहकारी विभाग और वित्त विभाग ने चावल, गन्ना, चीनी और अन्य सामग्रियों की खरीद की प्रक्रिया तेज कर दी है. पोंगल आने में अभी लगभग एक महीना बचा है, इसलिए सभी विभाग पूर्ण तैयारी में जुट गए हैं.
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले दिया जाने वाला यह पैकेज वोटरों पर प्रभाव डाल सकता है और चुनाव में इसकी चर्चा भी खूब होगी.
पहले क्या मिला था और अब क्या बदल सकता है?
डीएमके सरकार के आने के बाद साल 2022 में पोंगल उपहार पैकेज नहीं दिया गया था, जिस पर काफी आलोचना हुई. इसके बाद 2023 और 2024 में पैकेज के साथ 1000 रुपये नकद दिए गए. इस साल लोगों को चावल, चीनी और गन्ना तो मिला, लेकिन नकद राशि नहीं दी गई, जिससे कई जगह नाराजगी भी देखी गई.
2021 में एआईएडीएमके सरकार ने चुनाव से पहले पोंगल पर 2,500 रुपये नकद दिए थे. वहीं अब कहा जा रहा है कि डीएमके सरकार शुरुआत में लोगों को 5,000 रुपये देने पर विचार कर रही थी, लेकिन वित्तीय कमी के कारण इसे घटाकर 3,000 रुपये पर विचार किया जा रहा है. हालांकि इतने बड़े खर्च को कैसे पूरा किया जाएगा, इस पर वित्त विभाग को रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है.
गुणवत्ता की कड़ी जांच
सरकार ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि इस बार पोंगल पैकेज की गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए. सभी वस्तुओं की जांच की जा रही है ताकि परिवारों तक खराब या ग़ैर-मानक सामग्री न पहुंचे. पोंगल पैकेज की आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही इसका ऐलान करेगी. उसी घोषणा में यह भी बताया जाएगा कि लोगों को नकद राशि दी जाएगी या नहीं.
पोंगल त्योहार जनवरी के पहले पक्ष में पड़ता है, और चुनाव से सिर्फ 3 महीने पहले होने के कारण यह फैसला राजनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.


