इंडिगो संकट पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से मना कर दिया है. एक वकील ने अपनी याचिका चीफ जस्टिस सूर्यकांत के सामने रखी थी, जिस पर सीजेआई ने कहा कि एयरलाइन चलाना कोर्ट का काम नहीं है. निश्चित रूप से मामला गंभीर लगता है, लेकिन सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं. चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि लगता है कि सरकार ने समय पर कार्रवाई की है. उम्मीद है इससे असर पड़ेगा.
इंडिगो फ्लाइट्स के कैंसिलेशन और देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. सीजेआई सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची भी मामले पर सुनवाई कर रहे थे. बेंच ने कहा कि एयरपोर्ट्स पर लोग फंसे हुए हैं और उनको स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं.
कोर्ट ने कहा, ‘यह एक गंभीर मामला है. लाखों लोग एयरपोर्ट्स पर फंसे हैं. हम ये जानते हैं.. सरकार ने समय से कुछ कदम उठाए हैं और मामले पर संज्ञान लिया. हमें पता है कि लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं.’ याचिककर्ता वकील ने कहा कि इंडिगो में कई पद खाली हैं और मौजूदा स्थितियों के कारण यात्रियों को परेशानियां हो रही हैं. उन्होंने कहा कि ग्राहकों को सूचित नहीं किया गया है.
ऐसी ही याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में भी लगी है. यह याचिका पैसेंजर्स के रिफंड के लिए फाइल की गई है. वकील ने कोर्ट में कहा, ‘हमने इंडिगो मामले को लेकर पीआईएल दायर की है. कई लोग एयरपोर्ट्स पर फंसे हैं. हवाई अड्डों पर जमीनी स्थिति अमानवीय है. हम उम्मीद कर रहे हैं कि कोर्ट इंडिगो को एयरपोर्ट पर ग्राउंड सपोर्ट के लिए आदेश देगा. लोगों को रिफंड नहीं मिला है.’
दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस डी के उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गडेला की बेंच ने बुधवार को सुनवाई के लिए मामला लिस्ट कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि सरकार पहले ही इस मामले को लेकर निर्देश दे चुकी है.
(निपुण सहगल के इनपुट के साथ)
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