तेलंगाना हाई कोर्ट ने राज्य में होने वाले पंचायत चुनावों पर अंतरिम रोक (स्टे) लगाने से इनकार कर दिया है. यह फैसला पंचायत चुनावों में आरक्षण को लेकर जारी सरकारी आदेश (GO 46) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आया. अदालत के इस रुख से राज्य निर्वाचन आयोग को बड़ी राहत मिली है, जो चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी में जुटा है.
बेंच ने किया कड़ा सवाल?
मुख्य न्यायाधीश उज्ज्वल कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ताओं से एक कड़ा सवाल किया. अदालत ने पूछा, “क्या केवल इसलिए कि उप-श्रेणी (सब-कैटेगरी) का आरक्षण लागू नहीं हुआ है, आप पूरे चुनावों को रद्द कराना चाहते हैं?”
अदालत का यह सवाल इस बात की ओर इशारा करता है कि वह चुनाव प्रक्रिया को बिना किसी मजबूत और तार्किक आधार के रोकने के पक्ष में नहीं है.
चुनाव आयोग वकील की दलीलें
इस दौरान, राज्य निर्वाचन आयोग के वकील ने अपनी दलीलें पेश करते हुए कहा कि एक बार चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद अदालतों के हस्तक्षेप की सीमा बहुत सीमित होती है. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि 42% आरक्षण वाले जीओ पर पहले हुई सुनवाई के दौरान ही आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह पुरानी व्यवस्था के तहत ही चुनाव कराना चाहता है, जब तक कि नए आरक्षण नियमों पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता.
यह मामला राज्य सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग (BC) के लिए पंचायतों में आरक्षण 34% से बढ़ाकर 42% करने से जुड़ा है. याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इस आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया में कई कानूनी कमियां हैं और उप-श्रेणियों को न्याय नहीं मिला है.
कोर्ट ने किया कोई अंतरिम आदेश
हालांकि, हाईकोर्ट ने अभी तक इस मामले में कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया है और सुनवाई जारी है. अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के अगले आदेश पर टिकी हैं, जिससे राज्य की ग्रामीण राजनीति की दिशा तय होगी.


