बिहार विधानसभा चुनाव 2025 ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि सीमांचल AIMIM का अभेद्य किला बन चुका है. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने राज्य की 243 सीटों में से केवल 25 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन इसके बावजूद 5 सीटों पर जीत दर्ज कर अपने प्रभाव का मजबूत संदेश दिया. इस जीत से असदुद्दीन ओवैसी काफी खुश नजर आ रहे हैं. उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर लिखा कि सीमांचल के मेरे भाइयों और बहनों, आप का शुक्रिया अदा करने के लिए इंशाल्लाह मैं 21 और 22 नवंबर को मैं सीमांचल में रहूंगा.
AIMIM पार्टी की जीतें सिर्फ संयोग या किसी एक मुद्दे का परिणाम नहीं हैं. यह लगातार बने भरोसे, स्थानीय मुद्दों की गहरी समझ, और समुदाय आधारित राजनीतिक रणनीति का परिणाम है. AIMIM जिन पांच सीटों पर जीती, वे सभी सीमांचल के उन इलाकों में आती हैं जहां मुस्लिम आबादी 60% या उससे अधिक है. इन सीटों पर AIMIM ने जिन उम्मीदवारों को उतारा, उनमें से कई पहले से स्थानीय लोकप्रियता और जमीनी पकड़ रखते थे.
सीमांचल के मेरे भाइयों और बहनों, आप का शुक्रिया अदा करने के लिए इंशाल्लाह मैं 21 और 22 नवंबर को मैं सीमांचल में रहूँगा.
— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) November 16, 2025
सीमांचल का चुनावी तापमान
सीमांचल का चुनावी तापमान हमेशा विशेष होता है क्योंकि यहां के सामाजिक समीकरण बाकी बिहार से काफी अलग हैं. बड़ी मुस्लिम आबादी, सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन, बाढ़ और बुनियादी ढांचे की समस्याएं यहां के मुद्दों को विशिष्ट बनाती हैं. AIMIM ने इन मुद्दों को अन्य दलों की तुलना में अधिक मुखरता से उठाया, जो उसके पक्ष में गया.
AIMIM की जीती गई 5 प्रमुख सीटें:
जोकीहाट – मुरशिद आलम
बहादुरगंज – तौसीफ आलम
कोचाधामन – सरवर आलम
अमौर – अख्तरुल ईमान
बायसी – गुलाम सरवर
क्यों सीमांचल बना AIMIM का सबसे मजबूत गढ़
सीमांचल का राजनीतिक और सामाजिक चरित्र AIMIM की रणनीति के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है. यहां कई विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी 60 से 70 प्रतिशत तक है, जो राज्य के अन्य क्षेत्रों की तुलना में बहुत अधिक है. यह जनसांख्यिकीय विशेषता AIMIM की राजनीति के केंद्र में है, क्योंकि पार्टी मुस्लिम समुदाय के हितों और असुरक्षाओं को बड़े पैमाने पर संबोधित करती है.
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