संसद में 130वें संविधान संशोधन विधेयक 2025, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 और केंद्रशासित प्रदेशों के शासन (संशोधन) विधेयक, 2025 को लेकर एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन किया गया है. इस समिति का उद्देश्य तीनों विधेयकों के प्रावधानों का गहन परीक्षण करना, उन पर विभिन्न पक्षों की राय लेना और विस्तृत अनुशंसाएं तैयार कर संसद को रिपोर्ट सौंपना है.
लोकसभा अध्यक्ष की ओर से बुधवार (12 नवंबर, 2025) को जारी अधिसूचना के अनुसार, भाजपा की लोकसभा सांसद अपराजिता सारंगी को इस समिति के अध्यक्ष के तौर पर नियुक्त किया गया है. इस समिति में कुल 31 सदस्य हैं, जिसमें 21 सदस्य लोकसभा और 10 सदस्य राज्यसभा से नामित किए गए हैं.
लोकसभा से JPC में शामिल हुए कौन-कौन सांसद?
लोकसभा से अपराजिता सारंगी, रविशंकर प्रसाद, भर्तृहरि महताब, प्रदन बरुआ, बृजमोहन अग्रवाल, विष्णु दयाल राम, डी. के. अरुणा, पुरुषोत्तम रूपाला, अनुराग ठाकुर, श्र लवु श्री कृष्ण देवरेयालु, देवेश चंद्र ठाकुर, धैर्यशील संभाजीराव माने, बलाशौरी वल्लभनेनी, सुप्रिया सुले, असदुद्दीन ओवैसी, हरसिमरत कौर बादल, डॉ. इंद्रा हांग सुब्बा, सुनील दत्तात्रेय तटकरे, एम. मल्लेश बाबू, जयंता बसुमातारी और राजेश वर्मा शामिल हैं.
राज्यसभा से इन सांसदों को किया गया नामित
वहीं, राज्यसभा से बृजलाल, उज्जवल निकम, नबाम रेबिया, नीरज शेखर, मनन कुमार मिश्रा, डॉ. के. लक्ष्मण, सुधा मूर्ति, बीरेंद्र प्रसाद बैश्य, सी. वी. शनमुगम और एस. निरंजन रेड्डी शामिल है.
तीनों विधायकों की समीक्षा के बाद संसद में रिपोर्ट पेश करेगी JPC
यह संयुक्त समिति (JPC) तीनों विधेयकों के संवैधानिक, प्रशासनिक और नीतिगत पहलुओं की समीक्षा करेगी. समिति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रस्तावित संशोधन न केवल भारत के संविधान की भावना और संघीय ढांचे के अनुरूप हों, बल्कि देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए समान रूप से न्यायसंगत भी हों. समिति विभिन्न मंत्रालयों, विधि विशेषज्ञों, संवैधानिक विद्वानों और नागरिक समाज संगठनों से परामर्श भी ले सकती है. समिति अपने कार्यकाल के दौरान आवश्यक बैठकें करेगी, प्रासंगिक दस्तावेजों का अध्ययन करेगी और प्राप्त सुझावों के आधार पर अपनी सिफारिशें संसद के समक्ष रिपोर्ट के रूप में पेश करेगी.
किन पार्टियों में अपने सांसदों को नहीं किया शामिल
इस समिति में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राजद और डीएमके जैसी प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने अपने सांसदों को शामिल नहीं किया है. इस दलों ने बिल को संसद में पेश करते समय भी इसका विरोध किया था. बाद में JPC को भेजने के निर्णय के बाद भी इन दलों ने इनके बहिष्कार की घोषणा की थी.
लोकसभा अध्यक्ष ने मांगे नाम, पार्टियों ने किया इनकार
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की तरफ से बार-बार सभी दलों को पत्र लिखकर JPC में शामिल होने के लिए नाम माना गया था, लेकिन इन दलों की ओर से नाम नहीं दिए गए. सूत्रों के मुताबिक, कुछ दिन पहले भी लोकसभा स्पीकर ने फोन करके JPC से नामों की मांग की थी, लेकिन इन दलों ने नाम देने से मना कर दिया.
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