अगले साल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं. लेकिन चुनाव से पहले ही राज्य में राजनीति तेज हो गई है. अब बंगाल में बीजेपी और टीएमसी के बीच गीत को लेकर राजनीति शुरू हो गई है. राष्ट्रगीत वंदे मातरम बनाम राज्यगान “बांग्लार माटी बांग्लार जोल” , एक तरफ जहां बीजेपी और केंद्र सरकार वंदे मातरम के 150 वें वर्षगांठ की आड़ में बंगाली अस्मिता को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश में है, वहीं टीएमसी रविन्द्र नाथ टैगोर की रचना बांग्लार माटी बांग्लार जोल को स्कूलों में प्रेयर के रूप में बढ़ाने का फैसला लिया है. बंगाल चुनाव से पहले दोनों दलों ने बंगाली अस्मिता और संस्कृति के मुद्दे पर खुद को दूसरे से बड़ा दिखाने की कोशिश तेज हो गई है.
बीजेपी ने चुनावी बिसात बिछानी की शुरू
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है. भाजपा ने तय किया है कि एक बार फिर राष्ट्रवादी विचारधारा को मजबूत किया जाय. लिहाजा भाजपा ने वंदे मातरम को एक प्रमुख चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की रणनीति बनाई है. राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के जरिये बीजेपी विधानसभा चुनाव में हिंदुत्व, बंगाली संस्कृति और अस्मिता के मुद्दे को उठाकर TMC सरकार के खिलाफ ध्रुवीकरण का प्रतीक बनाकर वोटरों को लामबंद करने की कोशिश में है.
बीजेपी ने की TMC सरकार पर हमला बोलने की प्लानिंग
भाजपा ने तय किया है कि वंदे मातरम के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की विरासत से जोड़कर TMC सरकार पर हमला बोला जाए. TMC को “बंगला-विरोधी” साबित करने के लिए वंदे मातरम का राज्यभर में सामूहिक गायन होगा. इस मुहिम की शुरुआत पश्चिम बंगाल और दिल्ली से एक साथ हो गई है. शुक्रवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस और टीएमसी दोनो को इस गीत की उपेक्षा करने के लिए जिम्मेदार ठहराया.
टीएमसी ने लिया ये बड़ा फैसला
लेकिन बीजेपी की इस रणनीति का जवाब देने की तैयारी टीएमसी ने भी कर ली है. पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने बीजेपी के रणनीति को भापते हुए इसकी काट निकालने की रणनीति बनाई है. पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार को सभी स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभाओं में राज्य गीत, ‘बांग्लार माटी, बांग्लार जोल’ गाना अनिवार्य कर दिया है. राज्य माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सभी उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को इसकी अधिसूचना जारी कर दी. रविन्द्र नाथ टैगोर का 1905 में लिखा गया यह प्रसिद्ध गीत अब बंगाल के प्रत्येक सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में प्रत्येक दिन की शुरुआत में प्रार्थना गीत के रूप में गाया जाएगा. यानी बीजेपी की बंगाल अस्मिता और संस्कृति के मुद्दे की काट के रूप में टीएमसी ने राज्यगान को लाकर बीजेपी की रणनीति को कमजोर करने की कोशिश की है.
ये भी पढ़ें-


