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चीन के ‘वॉटर बम’ का भारत कैसे देगा जवाब? सामने आया हाइड्रो प्रोजेक्ट्स का ब्लूप्रिंट; ड्रैगन को
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चीन के ‘वॉटर बम’ का भारत कैसे देगा जवाब? सामने आया हाइड्रो प्रोजेक्ट्स का ब्लूप्रिंट; ड्रैगन को

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भारत ने चीन के विशाल जलविद्युत परियोजना के जवाब में ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन में कम से कम 208 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट बनाने की योजना तैयार की है. ये सभी परियोजनाएं 12 उप-बेसिनों में बनाई जाएंगी, जिनसे करीब 65,000 मेगावॉट बिजली उत्पादन की क्षमता हासिल होगी. फिलहाल यह योजना ऊर्जा मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के निगरानी में है.

चीन के डैम का जवाब
अधिकारियों के मुताबिक, चीन तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी (जिसे भारत में ब्रह्मपुत्र और बांग्लादेश में जमुना कहा जाता है) पर 60,000 मेगावॉट क्षमता का डैम बना रहा है, जो दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रो प्रोजेक्ट होगा. भारत की योजना इसी के जवाब में नदी के पूरे हिस्से पर कई छोटे-बड़े प्रोजेक्ट बनाकर जल संसाधनों का बैलेंसड इस्तेमाल और सुरक्षा सुनिश्चित करने की है.

सबसे बड़ा प्रोजेक्ट- सियांग अपर मल्टीपरपज प्रोजेक्ट
भारत के प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स में सबसे बड़ा सियांग अपर मल्टीपरपज प्रोजेक्ट (SUMP) है, जिसकी क्षमता 11,000 मेगावॉट होगी. यह अरुणाचल प्रदेश में बनना प्रस्तावित है, लेकिन स्थानीय विरोध के चलते एक दशक से रुका हुआ है. मई 2025 में एनएचपीसी ने पुलिस सुरक्षा में सर्वे का काम दोबारा शुरू किया है.

ब्रह्मपुत्र बेसिन का महत्व
ब्रह्मपुत्र नदी का बेसिन अरुणाचल प्रदेश, असम, सिक्किम, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड और पश्चिम बंगाल तक फैला है. यह क्षेत्र भारत की कुल अप्रयुक्त जलविद्युत क्षमता का 80% हिस्सा रखता है, जिसमें से अकेले अरुणाचल प्रदेश में ही 52 गीगावॉट (GW) क्षमता है.

मौजूदा और नई परियोजनाएं
वर्तमान में ब्रह्मपुत्र बेसिन में लगभग 4,807 मेगावॉट की क्षमता वाली परियोजनाएं चल रही हैं, जबकि 2,000 मेगावॉट के प्रोजेक्ट निर्माणाधीन हैं. नई योजना में बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज और छोटे (<25 मेगावॉट) प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं.

चीन के डैम को बताया ‘वाटर बम’
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा था कि चीन का डैम राज्य की सीमा के बेहद पास बन रहा है और यह ‘वाटर बम’ जैसा खतरा साबित हो सकता है. उन्होंने चेतावनी दी थी कि ‘यह हमारी जनजातियों और आजीविका के लिए अस्तित्व का संकट बन सकता है.’ विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत चीन की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहा है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जुलाई में अपनी बीजिंग यात्रा के दौरान यह मुद्दा औपचारिक रूप से उठाया था.



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